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दरगाह पर उमड़े जायरीन,अमनोअमान की हुई दुआख्वानी
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गोपीगंज। मुख्यालय मार्ग पर इब्राहिमपुर में स्थित हजरत इब्राहिम शहीद और बाबा इस्माइल शहीद का सालाना उर्स मुबारक बुधवार को पूरे शानोशौकत के साथ मनाया गया। उर्स में बड़ी संख्या में शिरकत कर जायरीनों ने चादरपोशी, शिरनी, मालाफूल चढ़ाकर अकीदत और एहतमाम के साथ वतन में अमनोअमान की दुआख्वानी की गई।
शब-ए-बारात के 11 दिनों बाद यानी चांद की 25वीं तारीख को हर वर्ष हजरत इब्राहिम शहीद और बाबा इस्माइल शहीद का सालाना उर्स मनाया जाता है। उर्स की पूर्व संध्या पर ही दरगाह को सजाने, साफ-सफाई का दौर जारी रहा। दुकानों के लगने के साथ-साथ और रंग-बिरंगे विद्युत झालरों से दरगाह शरीफ को सजाकर आकर्षक रूप दिया गया था। बुधवार की सुबह कुरआनख्वानी और दिन में फातिहा के बाद गुश्ल की रश्म अदायगी कर उर्स का आगाज कर दिया गया। दोपहर से शुरू हुए चादरपोशी एवं जियारत का क्रम देर शाम तक चलता रहा। जनपद के कोने-कोने से दरगाह शरीफ पर जायरीनों के पहुंचने का क्रम जारी रहने से देर शाम तक भीड़ उमड़ी रही। जहां धर्म-जाति और मजहब को दरकिनार कर लोग अपनी-अपनी मुरादों को लेकर श्रद्धा के साथ मजार पर चादर व फूल चढ़ाने के बाद दुआएं मांगी। सालाना उर्स के दौरान दरगाह के बाहर खानपान, सौंदर्य प्रशाधन, खिलौने एवं घरेलू सामानों की सजीं दुकानों पर मेलार्थियों ने पहुंच जमकर खरीदारी की जाती रही। बच्चों ने जहां अपने मनपसंद खिलौना-व्यंजनों का आनंद लिया वहीं महिलाओं ने श्रृंगार सामग्री के साथ-साथ घरेलू सामानों की खरीदारी की। अंजुमन गौसिया कमेटी की ओर से सुबह कुरआनख्वानी के बाद अपराह्न गागर चादर का जुलूस निकाला गया जिसमे शामिल लोग बाबा की शान में नातिया कलाम गुनगुनाते हुए दरगाह शरीफ पर पहुंचे जहा अकीदत और एहतमाम के साथ चादरपोशी की। उर्स पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन के साथ कमेटी के सदर एनुलहक सरवर, मोहम्मद अनीश, लल्लू चौधरी, जमील, मुमताज, आरिफ शमशुलहक, युनूस मोहम्मद, अकरम शकील, मुस्तफा आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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शब-ए-बारात के 11 दिनों बाद यानी चांद की 25वीं तारीख को हर वर्ष हजरत इब्राहिम शहीद और बाबा इस्माइल शहीद का सालाना उर्स मनाया जाता है। उर्स की पूर्व संध्या पर ही दरगाह को सजाने, साफ-सफाई का दौर जारी रहा। दुकानों के लगने के साथ-साथ और रंग-बिरंगे विद्युत झालरों से दरगाह शरीफ को सजाकर आकर्षक रूप दिया गया था। बुधवार की सुबह कुरआनख्वानी और दिन में फातिहा के बाद गुश्ल की रश्म अदायगी कर उर्स का आगाज कर दिया गया। दोपहर से शुरू हुए चादरपोशी एवं जियारत का क्रम देर शाम तक चलता रहा। जनपद के कोने-कोने से दरगाह शरीफ पर जायरीनों के पहुंचने का क्रम जारी रहने से देर शाम तक भीड़ उमड़ी रही। जहां धर्म-जाति और मजहब को दरकिनार कर लोग अपनी-अपनी मुरादों को लेकर श्रद्धा के साथ मजार पर चादर व फूल चढ़ाने के बाद दुआएं मांगी। सालाना उर्स के दौरान दरगाह के बाहर खानपान, सौंदर्य प्रशाधन, खिलौने एवं घरेलू सामानों की सजीं दुकानों पर मेलार्थियों ने पहुंच जमकर खरीदारी की जाती रही। बच्चों ने जहां अपने मनपसंद खिलौना-व्यंजनों का आनंद लिया वहीं महिलाओं ने श्रृंगार सामग्री के साथ-साथ घरेलू सामानों की खरीदारी की। अंजुमन गौसिया कमेटी की ओर से सुबह कुरआनख्वानी के बाद अपराह्न गागर चादर का जुलूस निकाला गया जिसमे शामिल लोग बाबा की शान में नातिया कलाम गुनगुनाते हुए दरगाह शरीफ पर पहुंचे जहा अकीदत और एहतमाम के साथ चादरपोशी की। उर्स पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन के साथ कमेटी के सदर एनुलहक सरवर, मोहम्मद अनीश, लल्लू चौधरी, जमील, मुमताज, आरिफ शमशुलहक, युनूस मोहम्मद, अकरम शकील, मुस्तफा आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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