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ंयम और धैर्य की प्रतिमूर्ति थीं सबरी माता
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:29 AM IST
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सुरियावां। सत्संग सेवा मंडल की ओर से रामलीला मैदान पर आयोजित रामकथा रविवार को संपन्न हो गई। अंतिम दिन काशी कोकिला सुप्रिया पाठक ने माता शबरी के संयम धैर्य और भक्ति की विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जीवन में संयम धारण करने की कला माता शबरी के जीवन दर्शन से ग्रहण की जा सकती है।
साध्वी ने बताया कि माता शबरी बाल्यावस्था में ही भगवान से मिलने का वरदान पाने के बाद से ही नित्य प्रतिदिन परमात्मा के आने के इंतजार में फूलों को चुनती और रास्ते में रखतीं। यह क्रम उन्हें कभी विचलित नहीं कर पाया और अंतत: परमात्मा को भक्त के जूठे बेर खाकर उनकी भक्ति के अनूठे उदाहरण को मानव के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने बजरंग बली की श्रेष्ठता और बंदरों से दोस्ती के बारे में बताया। संचालन जटाशंकर मौर्य ने किया। डॉ.एमसी गुप्ता ने कथावाचक को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर घनश्याम दास गुप्ता, विनय चौरसिया, दिनेश कौशल, शिव भूषण दुबे, छेदी लाल साहू, रतन जायसवाल आदि मौजूद रहे।
साध्वी ने बताया कि माता शबरी बाल्यावस्था में ही भगवान से मिलने का वरदान पाने के बाद से ही नित्य प्रतिदिन परमात्मा के आने के इंतजार में फूलों को चुनती और रास्ते में रखतीं। यह क्रम उन्हें कभी विचलित नहीं कर पाया और अंतत: परमात्मा को भक्त के जूठे बेर खाकर उनकी भक्ति के अनूठे उदाहरण को मानव के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने बजरंग बली की श्रेष्ठता और बंदरों से दोस्ती के बारे में बताया। संचालन जटाशंकर मौर्य ने किया। डॉ.एमसी गुप्ता ने कथावाचक को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर घनश्याम दास गुप्ता, विनय चौरसिया, दिनेश कौशल, शिव भूषण दुबे, छेदी लाल साहू, रतन जायसवाल आदि मौजूद रहे।
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