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अधर में 50 करोड़ की परियोजनाएं
भदोही/ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 21 Mar 2016 01:12 AM IST
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जिला मुख्यालय ज्ञानपुर के सामने निर्माणाधीन जिला अस्पताल।
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जिले में 50 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का निर्माण अधर में लटका हुआ है। कारण, शासन-प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी निर्माण एजेंसियों की लापरवाही है। इससे डेड लाइन खत्म होने के एक दो महीने नहीं करीब दो से ढाई साल के बाद भी परियोजनाएं शत प्रतिशत पूरी नहीं हो सकीं। कार्यदायी संस्थाओं की उदासीनता से सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है।
जनपद सृजन को करीब दो दशक गुजर चुके हैं लेकिन कई विभागों में संसाधनों की समस्या बनी हुई है। बड़े-बड़े विभागों में तो खुद के भवन भी नहीं है। किराए के भवन में ही उनका कार्यालय चल रहा है। जनपद न्यायालय, तहसील भवन, पालिटेक्निक भवन,
राजकीय हाईस्कूल, 100 शय्या का जिला चिकित्सालय , तहसील भवन ज्ञानपुर समेत कई निर्माण कार्य हैं। 2008 से शुरू हुआ 100 शय्या का जिला अस्पताल 2014 में पूर्ण होना था लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका। 12 करोड़ की लागत से बनने वाला अस्पताल 17 करोड़ खर्च होने के बाद भी आधा अधूरा ही है।
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इसी तरह स्वास्थ्य विभाग की कई परियोजनाओं के अलावा तहसील भवन भी पूरा नहीं हो सका। 2011 में छह करोड़ की लागत से बन रहे तहसील को 2013 में पूर्ण होना था। शासन से बजट स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण एजेंसियों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पिछले दिनों मुख्य सचिव आलोक रंजन के आदेश के बाद भी कार्यदायी संस्थाएं काम के प्रति गंभीर नहीं है। मुख्य सचिव, मंडलायुक्त के अलावा डीएम की सख्ती के बाद भी निर्माण कार्य में गति नहीं आ रही है।
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जनपद सृजन को करीब दो दशक गुजर चुके हैं लेकिन कई विभागों में संसाधनों की समस्या बनी हुई है। बड़े-बड़े विभागों में तो खुद के भवन भी नहीं है। किराए के भवन में ही उनका कार्यालय चल रहा है। जनपद न्यायालय, तहसील भवन, पालिटेक्निक भवन,
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राजकीय हाईस्कूल, 100 शय्या का जिला चिकित्सालय , तहसील भवन ज्ञानपुर समेत कई निर्माण कार्य हैं। 2008 से शुरू हुआ 100 शय्या का जिला अस्पताल 2014 में पूर्ण होना था लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका। 12 करोड़ की लागत से बनने वाला अस्पताल 17 करोड़ खर्च होने के बाद भी आधा अधूरा ही है।
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इसी तरह स्वास्थ्य विभाग की कई परियोजनाओं के अलावा तहसील भवन भी पूरा नहीं हो सका। 2011 में छह करोड़ की लागत से बन रहे तहसील को 2013 में पूर्ण होना था। शासन से बजट स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण एजेंसियों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पिछले दिनों मुख्य सचिव आलोक रंजन के आदेश के बाद भी कार्यदायी संस्थाएं काम के प्रति गंभीर नहीं है। मुख्य सचिव, मंडलायुक्त के अलावा डीएम की सख्ती के बाद भी निर्माण कार्य में गति नहीं आ रही है।