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खिसकते जलस्तर से सैकड़ो हैंडपंप हुए बेपानी
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ज्ञानपुर/सीतामढ़ी। अत्यधिक जल दोहन से भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे खिसकता जा रहा है। तमाम प्रयासों के बावजूद पूरे जिले में जल संचयन की स्थिति सुधर नहीं पा रही है। मई-जून की गर्मी से पहले ही 250 से अधिक हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। समय रहते नहीं चेता गया तो आने वाले समय में जल संकट की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है।
पानी के बिना जीवन की उम्मीद नहीं की जा सकती। बावजूद इसके इसका जलदोहन तेजी से हो रहा है। सरकारों की ओर से जल संचयन को लेकर भले ही तमाम प्रयास किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर उसका खास असर नहीं दिख रहा है। पिछले कुछ वर्षों से मनमाने तरीके से घर- घर हैंडपंपों के साथ सबमर्सिबल पंपों की स्थापना से मनमाना भूगर्भ जल दोहन हो रहा है। इससे स्थिति बिगड़ती जा रही है। आलम यह है कि पूर्व में स्थापित हैंडपंप मार्च के महीने में ही पानी उगलना बंद करते जा रहे हैं।
ज्ञानपुर जिला कारागार के सामने लगे हैंडपंप ने जहां पानी देना बंद कर दिया है, वहीं दरवांसी गांव में भी हैंडपंप सूख चुका है। यह दो ही मामले नहीं हैं। हर गांव में एक से दो हैंडपंप बेकार हो चुके हैं। जिला पंचायतराज विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 250 से अधिक हैंडपंपों के रिबोर का प्रस्ताव आया है, जिसे कराने के लिए दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। जलस्तर खिसकने से जिले के सभी छह ब्लॉक डार्कजोन में चले गए थे। एक साल पूर्व चार ब्लॉक तो डार्कजोन से हट गए, लेकिन ज्ञानपुर और भदोही अब भी डार्कजोन में हैं। इन ब्लॉकों में गहरी बोरिंग नहीं कराई जा सकती। बताते चलें कि जिलेे के तीनों तहसीलों में 50 हजार से अधिक हैंडपंप स्थापित हुए हैं। अवर अभियंता लघु सिंचाई छोटेलाल ने कहा कि जल संचयन जरूरी है, अन्यथा आने वाला समय काफी कष्टकारी होगा।
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आयरनयुक्त पानी पीने को मजबूर
सीतामढ़ी। तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की स्थिति दयनीय हो गई है। इलाके की करीब एक लाख की आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है। अधिकतर गंगा तटीय गांवों का भूगर्भ जल दूषित हो चुका है। कई स्थानों पर अत्यधिक आयरनयुक्त पानी की पुष्टि हुई है। इस तरह कोनिया के गंगा तटीय गांवों के लोग पानी के साथ मीठा जहर पीने को मजबूर हैं। कोनिया के छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, बसगोती मवैया, गजाधर पुर, कलातुलसी, धनतुलसी, भदरांव , शेरपुर, बहपुरा, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, शांतिपुर, टेढ़ी, मवैयाथान सिंह, इटहरा, मनीपुर, दुगुना, डीघ, कटरा बाजार, खेमापुर, अरई, करवंधिया, बनकट, नारेपार, बारीपुर, बनकट आदि ऐसे गंगा तटीय गांव प्रभावित हैं।
पानी के बिना जीवन की उम्मीद नहीं की जा सकती। बावजूद इसके इसका जलदोहन तेजी से हो रहा है। सरकारों की ओर से जल संचयन को लेकर भले ही तमाम प्रयास किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर उसका खास असर नहीं दिख रहा है। पिछले कुछ वर्षों से मनमाने तरीके से घर- घर हैंडपंपों के साथ सबमर्सिबल पंपों की स्थापना से मनमाना भूगर्भ जल दोहन हो रहा है। इससे स्थिति बिगड़ती जा रही है। आलम यह है कि पूर्व में स्थापित हैंडपंप मार्च के महीने में ही पानी उगलना बंद करते जा रहे हैं।
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ज्ञानपुर जिला कारागार के सामने लगे हैंडपंप ने जहां पानी देना बंद कर दिया है, वहीं दरवांसी गांव में भी हैंडपंप सूख चुका है। यह दो ही मामले नहीं हैं। हर गांव में एक से दो हैंडपंप बेकार हो चुके हैं। जिला पंचायतराज विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 250 से अधिक हैंडपंपों के रिबोर का प्रस्ताव आया है, जिसे कराने के लिए दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। जलस्तर खिसकने से जिले के सभी छह ब्लॉक डार्कजोन में चले गए थे। एक साल पूर्व चार ब्लॉक तो डार्कजोन से हट गए, लेकिन ज्ञानपुर और भदोही अब भी डार्कजोन में हैं। इन ब्लॉकों में गहरी बोरिंग नहीं कराई जा सकती। बताते चलें कि जिलेे के तीनों तहसीलों में 50 हजार से अधिक हैंडपंप स्थापित हुए हैं। अवर अभियंता लघु सिंचाई छोटेलाल ने कहा कि जल संचयन जरूरी है, अन्यथा आने वाला समय काफी कष्टकारी होगा।
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आयरनयुक्त पानी पीने को मजबूर
सीतामढ़ी। तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की स्थिति दयनीय हो गई है। इलाके की करीब एक लाख की आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है। अधिकतर गंगा तटीय गांवों का भूगर्भ जल दूषित हो चुका है। कई स्थानों पर अत्यधिक आयरनयुक्त पानी की पुष्टि हुई है। इस तरह कोनिया के गंगा तटीय गांवों के लोग पानी के साथ मीठा जहर पीने को मजबूर हैं। कोनिया के छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, बसगोती मवैया, गजाधर पुर, कलातुलसी, धनतुलसी, भदरांव , शेरपुर, बहपुरा, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, शांतिपुर, टेढ़ी, मवैयाथान सिंह, इटहरा, मनीपुर, दुगुना, डीघ, कटरा बाजार, खेमापुर, अरई, करवंधिया, बनकट, नारेपार, बारीपुर, बनकट आदि ऐसे गंगा तटीय गांव प्रभावित हैं।