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छह माह में कुष्ठ रोग के मिले 36 मरीज

Thu, 21 Oct 2021 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 12:27 AM IST
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36 patients of leprosy found in six months
छ जिले में अप्रैल से सितंबर तक चलाए गए अभियान के दौरान कुष्ठ रोग के 36 नए मरीजों के मिलने से विभाग सकते में हैं। मरीजों में कुष्ठ रोग की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग इनका नि:शुल्क उपचार शुरू किया। इस दौरान गंभीर दो मरीजों को उपचार के लिए नैनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डाक्टरों की मानें तो समय से उपचार शुरू होने से कुष्ठ रोग के कीटाणु शरीर से समाप्त हो जाते है।
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जिला कुष्ट रोग अधिकारी डॉ. जेसी सरोज ने बताया है कि कुष्ठ रोग एमबी और पीबी दो तरह का होता है। पीबी का छह माह तक इलाज चलता है। जबकि एमबी के मरीजों का उपचार एक वर्ष तक चलता है। शरीर में पांच से अधिक सुन्न दाग और दो नसें प्रभावित रहने वाला व्यक्ति एमबी तथा एक से पांच सुन्न दाग और एक नस प्रभावित रहने वाला मरीज पीबी कुष्ठ रोगी की श्रेणी में आता है। सीएचसी औराई में 11, भदोही में 13, गोपीगंज में 14, डीघ में आठ व सुरियावां में 12 समेत कुल 58 मरीजों का उपचार चल रहा है। जबकि दो गंभीर मरीजों को नैनी स्थित मिशन अस्पताल प्रयागराज में भर्ती कराया गया है। अप्रैल से सितंबर तक कुष्ठ रोग के 36 नए मरीज मिले, जिनका इलाज शुरू कर दिया गया है। जिला अस्पताल सहित सभी सीएचएचसी में कुष्ठ रोगियों के लिए पर्याप्त दवा उपलब्ध है। कुष्ठ से दिव्यांग मरीजों का मुफ्त आपरेशन कराया जाता है और उन्हें आठ हजार रुपये का भुगतान तीन किश्तों में किया जाता है।
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ये है लक्षण
रोगी के शरीर में संक्रमित स्थानों की संवदेनशीलता समाप्त हो जाती है और शरीर के प्रभावित भागों पर स्पर्श महसूस नहीं होता है। कुछ तरह के मामलों में पहले त्वचा पर दो से तीन सेमी व्यास के पीलापन और लाल रंग लिए चमकदार चकत्ते उभरते हैं। इनमें सूजन आ जाती है। हाथ, उंगली या पैर की अंगुली भी सुन्न हो सकती है, पलकों के झपकने में कमी होने से रोगी अंधेपन का शिकार हो सकता है। मुंह तथा संक्रमित स्थानों की त्वचा मोटी हो जाती है और नाड़ियों में सिकुड़न महसूस होती है। हाथ व पैरों और आंखों में कमजोरी, नसों में सूजन, मोटापन या दर्द, चेहरे, शरीर और कान पर गांठें और घाव, (जिसमें दर्द न हो रहा हो) के अलावा हाथ और पैरों में विकृति। रोग के अंतिम चरण में हाथों एवं पैरों की उंगलियों में घाव बन जाते हैं और ये गलकर समाप्त हो जाते हैं।
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