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Bhadohi News: 32 साल के युवा भदोही को अब भी ‘विकास’ का इंतजार
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ज्ञानपुर। जनपद की स्थापना को आज 32 साल पूरे हो गए। 32 सालों में भदोही ने तमाम बदलाव देखें, लेकिन अब भी मूलभूत सुविधाएं भदोही से दूर हैं।
विश्व भर में भदोही की अपनी अलग पहचान है। यहां पर खूबसूरत मखमली कालीन का निर्माण होता है। हर साल हजारों करोड़ का कालीन विदेशों में निर्यात करने वाला भदोही 32 सालों से विकास को लेकर कसमसा रहा है। 30 जून 1994 को जनपद बनने के बाद उम्मीद की किरण जगी कि अब विकास की इबारत लिखी जाएगी, हालांकि ऐसा हो न सका। विकास भवन, कलक्ट्रेट, दीवानी कचहरी की इमारतें जनपद को मिलीं तो कारागार, स्टेडियम और पुलिस लाइन का सृजन भी हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहले भी वाराणसी और प्रयागराज पर निर्भरता थी और आज भी है। बिजली का संकट बरकरार है।
शुद्ध पेयजल के लिए आज भी लोगों को तरसना पड़ता है। करीब तीन दशक के बाद भी मोढ़, सुरियावां, सुभाषनगर, महराजगंज, चौरी जैसे रूट पर प्राइवेट वाहनों का सहारा है। सबसे अधिक नुकसान औद्योगिक क्षेत्र में हुआ। तीन दशक में पूर्वांचल की शान कही जाने वाली औराई चीनी मिल, इंदिरा मिल बंद हो गई तो कई छोटी-छोटी कालीन कंपनियां भी दम तोड़ चुकी हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र सेज की परिकल्पना शुरू होने के साथ ही दम तोड़ गई।
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विश्व भर में भदोही की अपनी अलग पहचान है। यहां पर खूबसूरत मखमली कालीन का निर्माण होता है। हर साल हजारों करोड़ का कालीन विदेशों में निर्यात करने वाला भदोही 32 सालों से विकास को लेकर कसमसा रहा है। 30 जून 1994 को जनपद बनने के बाद उम्मीद की किरण जगी कि अब विकास की इबारत लिखी जाएगी, हालांकि ऐसा हो न सका। विकास भवन, कलक्ट्रेट, दीवानी कचहरी की इमारतें जनपद को मिलीं तो कारागार, स्टेडियम और पुलिस लाइन का सृजन भी हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहले भी वाराणसी और प्रयागराज पर निर्भरता थी और आज भी है। बिजली का संकट बरकरार है।
शुद्ध पेयजल के लिए आज भी लोगों को तरसना पड़ता है। करीब तीन दशक के बाद भी मोढ़, सुरियावां, सुभाषनगर, महराजगंज, चौरी जैसे रूट पर प्राइवेट वाहनों का सहारा है। सबसे अधिक नुकसान औद्योगिक क्षेत्र में हुआ। तीन दशक में पूर्वांचल की शान कही जाने वाली औराई चीनी मिल, इंदिरा मिल बंद हो गई तो कई छोटी-छोटी कालीन कंपनियां भी दम तोड़ चुकी हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र सेज की परिकल्पना शुरू होने के साथ ही दम तोड़ गई।
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