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विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई पेयजल समूह योजना

Sun, 23 Sep 2018 12:08 AM IST
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:08 AM IST
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विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई पेयजल समूह योजना
ज्ञानपुर। जिले के दो सौ से अधिक गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। कहीं तीन माह से तो कहीं एक महीने से पानी नहीं आ रहा है। पेयजल समूह योजना जल निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। चार दशक पहले स्थापित पेयजल इकाइयां खस्ताहाल हो गई हैं। कहीं पंप काम नहीं कर रहा है तो कहीं जर्जर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पेयजल की आपूर्ति बाधित है। इसके चलते ग्रामीण पेयजल के संकट से जूझ रहे हैं। पानी के लिए हैंडपंपों और अन्य साधनों पर ग्रामीण निर्भर हो गए हैं। जलापूर्ति व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए जल निगम ने सांसद से 24 करोड़ की सहायता दिलाने की मांग की है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए चार दशक पहले पेयजल समूह योजना लागू की गई थी। इसके तहत 40 पेयजल इकाइयों की स्थापना कर 250 गांवों में पाइपलाइन विछाई गई थी। लंबे समय से देखरेख और मरम्मत न होने के कारण पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज की समस्या आ गई है। साथ ही कई जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे सभी गांवों में सुचारु रूप से जलापूर्ति नहीं हो पा रही। मौजूदा समय में 60 फीसदी से अधिक (करीब दो सौ) गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। बानगी के तौर पर जिला मुख्यालय से लगे चकटोडर गांव की पेयजल समूह योजना से जुड़े भिदिउरा, भुड़की, कंसापुर, राजापुर समेत कई गांवों में पेयजल आपूर्ति बाधित है। इसी तरह जंगीगंज क्षेत्र की पेयजल इकाई से जुड़े सोनइचा, इनारगांव, कलनुआ समेत दर्जनभर गांवों में आपूर्ति नहीं हो रही है।
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50 से 60 फीसदी पेयजल इकाइयां ऐसी हैं, जिन पर ऑपरेटरों की तैनाती ही नहीं है। इसके चलते पास-पास के लोग बिजली आने पर इनका संचालन करते हैं। कई लो तो कभी हाई वोल्टेज के कारण कई नलकूपों की मोटरें जल गई हैं, जिन्हें विभाग ने दुरुस्त ही नहीं कराया। विभाग की इस लापरवाही से ग्रामीणों को शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना फ्लॉप हो रही है। जलापूर्ति ठप होने से ग्रामीणों के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। गांवों के लोग पुराने कुओं का सहारा लेते हैं लेकिन गर्मी के मौसम में अधिकतर कुएं भी सूख जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पेयजल समस्या को गंभीरता से लेना होगा, ताकि लोगों को संकट से छुटकारा मिले। जल निगम के एक्सईएन राम बिहारी ने बताया पेयजल इकाइयों को दुरुस्त कराने के लिए धन की जरूरत है। इसके लिए कि सांसद से 24 करोड़ के बजट की मांग की गई है।
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सुरियावां। क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों की पेयजल आपूर्ति कई वर्षों से नहीं हो रही है। सुरियावां विकास खंड के अबरना और अभिया पंप से दर्जनों गांवों में पेयजल की आपूर्ति होती थी। पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। मरम्मत के लिए विभाग के पास धन न होने के कारण गांवों की जलापूर्ति बंद कर दी गई है। अबरना पंप में दो पंप लगाए गए थे। कई वर्षों पूर्व एक पंप की मोटर और ट्रांसफार्मर जलने के बाद जल निगम के कर्मचारी मरम्मत के लिए ले गए थे, जो आज तक नहीं लगाए गए। इसके बाद से बलीपुर, मर्दनशाहपुर, चकबनवारी, पूरे बदल बहता, सांडा, पुरेबदल, विसाकापुरा, विसहि, गोदमा, चक्खुशहाल, सुजानगिर, भीमसेनपुर, बेला आदि गांवों की आपूर्ति ठप चल रही है। कांग्रेस के नेता प्रेम बिहारी उपाध्याय, मानिकचंद्र उपाध्याय, राम खेलावन उपाध्याय, रामधारी सिंह, धर्मराज यादव, शिव बहादुर, देवराज, फूलचंद्र, रमेश, शिव शंकर आदि ने डीएम से हस्तक्षेप कर पेयजल संकट के निवारण की मांग की है। इसी तरह अभिया पंप से जुड़े कैड़ा, तुलापुर, छतमा, तेज सिंहपुर, कीर्तिपुर, चकजीतराय, अभिया वन, पूरे मनोहर, अभिया आदि गांवों में आपूर्ति ठप है। गोदमा और कैड़ा गांव में खारे पानी की समस्या है। इसके बावजूद पेयजल आपूर्ति न होने से ग्रामीण परेशान हैं।
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