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रोटहां विस्फोट में लौटने लगी जिंदगी
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चौरी। यूपी से लेकर बंगाल तक को हिला देने वाले विस्फोट के पांचवें दिन बुधवार को रोटहां गांव में जिंदगी पटरी पर लौटती दिखी। घटनास्थल पर पुलिस और पीएसी की तैनाती के बीच ठप पड़ी लोगों की सामान्य दिनचर्या फिर से शुरू हो गई। कई दुकानें खुल गईं और कुछ के सामने से मलबे को तेजी से हटाया जा रहा था। तमाम लोग कामकाज पर लौट आए।
रोटहां में विस्फोट के पांचवें दिन घटनास्थल के आसपास की कई दुकानें खुल गईं। शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए एक कंपनी पीएसी के जवान घटनास्थल पर अभी भी डटे हुए हैं। गत शनिवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद दहशत के आलम में जी रहे ग्रामीणों का जीवन पटरी पर लौटा तो गांव की रौनक बढ़ गई। भदोही-बाबतपुर मार्ग पर कुछ दुकानें खुली दिखीं तो कुछ दुकानों को खोलने के लिए आसपास से मलबा हटाया गया। घटना के बाद से सहमे आसपास के लोग घरों में ही दुबके पड़े थे। इससे रोजी रोटी पर असर दिखने लगा था। अब धीरे धीरे जिंदगी पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। धमाके से सहमे बच्चरें ने भी स्कूल जाना बंद कर दिया था। लेकिन बुधवार को तमाम बच्चे स्कूल गए। चाय-पान की दुकानें भी गुलजार हो गईं। हालांकि बंगलादेशी होने की अफवाह से पलायन कर चुके बुनकरों के कारण कालीन कारखानों में लूमों के खटर-पटर की आवाज फिलहाल सुनाई पड़ने की उम्मीद कम ही है।
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रोटहां में विस्फोट के पांचवें दिन घटनास्थल के आसपास की कई दुकानें खुल गईं। शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए एक कंपनी पीएसी के जवान घटनास्थल पर अभी भी डटे हुए हैं। गत शनिवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद दहशत के आलम में जी रहे ग्रामीणों का जीवन पटरी पर लौटा तो गांव की रौनक बढ़ गई। भदोही-बाबतपुर मार्ग पर कुछ दुकानें खुली दिखीं तो कुछ दुकानों को खोलने के लिए आसपास से मलबा हटाया गया। घटना के बाद से सहमे आसपास के लोग घरों में ही दुबके पड़े थे। इससे रोजी रोटी पर असर दिखने लगा था। अब धीरे धीरे जिंदगी पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। धमाके से सहमे बच्चरें ने भी स्कूल जाना बंद कर दिया था। लेकिन बुधवार को तमाम बच्चे स्कूल गए। चाय-पान की दुकानें भी गुलजार हो गईं। हालांकि बंगलादेशी होने की अफवाह से पलायन कर चुके बुनकरों के कारण कालीन कारखानों में लूमों के खटर-पटर की आवाज फिलहाल सुनाई पड़ने की उम्मीद कम ही है।
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