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डेढ़ वर्ष बाद भी नहीं मिल सका मुआवजा

Thu, 07 Feb 2019 06:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Feb 2019 06:15 PM IST
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डेढ़ वर्ष बाद भी नहीं मिल सका मुआवजा

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वहिदानगर। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के सिक्सलेन निर्माण से भले ही विकास की नई रेखा खींची जा रही हो, लेकिन इसके पीछे तमाम परिवारों का दर्द उनके लिए मुश्किलों का सबब बना है। हाईवे के चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए कई भवनों का मुआवजा डेढ़ साल बाद भी प्रभावितों को नहीं मिल पाया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 पर सिक्सलेन निर्माण शुरू हुए डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन बेघर हो चुके परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। इससे उनमें रोष है।
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राजमार्ग के राजातालाब-हंडिया खंड पर फोरलेन के दौरान गच्चा खा चुके परिवारों ने किसी तरह जीवन-यापन के लिए कर्ज आदि लेकर पुनर्निर्माण कर जीविकोपार्जन शुरू किया। उसी बीच शासन ने फोरलेन को सिक्सलेन में बदलने का नया आदेश पारित कर दिया। सिक्सलेन को अमलीजामा पहनाने के लिए एनएचएआई ने नापजोख शुरू कराते हुए अतिक्रमण का हवाला देकर ऊंज, गोधना, दौड़ियाही, सूफीनगर, नवधन-पावर हाउस, कलिंजरा मोड़, वहिदानगर, धनतुलसी मोड़, जंगीगंज बाजार, कौलापुर, गिराई, गोपीगंज नगर और पड़ाव, टोलप्लाजा-लालानगर, औराई, माधोसिंह, घोसिया, महाराजगंज बाजार, बाबूसराय समेत अन्य स्थानों पर कच्चे-पक्के निर्माण और दुकानों को अवैध करार देकर तोड़वा दिया गया था और तय मानक के हिसाब से मुआवजा भी देने का आश्वासन दिलाया था। एक दर्जन स्थानों पर मामला उलझने के बाद डीएम, एडीएम, एसडीएम और राजस्व विभाग ने यथास्थिति को स्पष्ट कर लोगों को शांत तो करा दिया, लेकिन प्राधिकरण के साथ हुए समझौते पर कोई भी खरा नहीं उतर पाया। धीरे-धीरे डेढ़ वर्ष का समय बीतने के बाद बेघर हो चुके परिवारों ने जब हाईवे प्राधिकरण के जिम्मेदार लोगों की चौखट पर दस्तक दी, लेकिन वहां से भी मायूसी हाथ लगी। उधर विश्वस्त सूत्रों का कहना रहा कि औराई क्षेत्र के जयरामपुर, घोसिया और माधोसिंह में स्थिति गंभीर होने पर मुआवजे के लिए भूमि आधिपत्य अधिकारी को सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया, लेकिन मुआवजा नहीं मिल सका है। अन्य क्षेत्रों का मामला अभी भी अधर में छोड़ कर काम निकाला जा रहा है।
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प्रोजेक्ट निदेशक का नहीं उठ सका फोन
ज्ञानपुर। नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट निदेशक वीके गुप्ता से जब कुछ जानकारी चाही गई तो उनका मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर बताता रहा। जबकि प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद कुमार पोहटे आउट ऑफ लोकेशन रहे। न तो मुआवजे के लिए नामित बेघर परिवारों की सूची ज्ञात हो सकी और न ही कितने लोगों को मुआवजा दिया गया इसकी पुष्टि। इससे प्रभावित परिवार असमंजस में हैं।
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