{"_id":"5c15454fbdec225b6767a3ac","slug":"21544897871-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माहो और झुलसा रोग से सतर्क हो जाएं किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माहो और झुलसा रोग से सतर्क हो जाएं किसान
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ज्ञानपुर। कृषि विभाग की ओर से शनिवार को पहले चरण की किसान पाठशाला का समापन हो गया। अंतिम दिन 79 न्याय पंचायतों के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पाठशाला आयोजित कर किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक विधि से खेती करने के लिए प्रेरित किया गया।
विभिन्न न्याय पंचायतों में शनिवार को आयोजित पाठशाला में 5498 पुरूष और 3566 महिला कृषकों को उद्यान, पशुपालन, गन्ना, मत्स्य और रेशम के बारे में प्रशिक्षकों ने जानकारी दी। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि कम लागत से अधिक मुनाफा कमाने के लिए किसान परंपरागत से हटकर खेती करें। उन्होंने कहा कि पाठशाला में जो जानकारी दी जा रही है, किसान उसका लाभ उठाएं। अभोली ब्लॉक में आयोजित किसान पाठशाला में कृषि विशेषज्ञ रामेश्वर सिंह ने किसानों को जागरूक किया। गेहूं और सरसो की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बीज शोधन और जैविक खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया।
उप निदेशक कृषि ने रबी की फसलों गेहूं, राई, सरसों और आलू में लगने वाले कीट, रोग और खरपतवारों से बचाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गेहूं में चौड़ी और सकरी पत्ती वाले खरपतवार जैसे गुल्ली डंडा, चटरी, बथुआ, कृष्णनील आदि की समस्या होती है। इसको नियंत्रित करने के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्लूजी 33 ग्राम को 300 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर प्रथम सिंचाई के बाद छिड़काव करें। गेहूं की फसल में मकोय नामक खरपतवार के लिए कारफेंट्राजोन, इथाइल 40 प्रतिशत डीएफ के 50 ग्राम को 500 लीटर में घोल बनाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। राई और सरसों में तापमान में गिरावट होने पर माहो का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए किसान एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5लीटर, डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी एक लीटर, आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी को एक लीटर के लिए छिड़काव करें। आलू में झुलसा रोग से बचाव के लिए 600 से 700 लीटर पानी में कापरऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी ढाई किलो, मैंकोजेब 75 प्रतिशत, डब्ल्यूपी दो किलो और जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी को दो किलो घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें।
विभिन्न न्याय पंचायतों में शनिवार को आयोजित पाठशाला में 5498 पुरूष और 3566 महिला कृषकों को उद्यान, पशुपालन, गन्ना, मत्स्य और रेशम के बारे में प्रशिक्षकों ने जानकारी दी। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि कम लागत से अधिक मुनाफा कमाने के लिए किसान परंपरागत से हटकर खेती करें। उन्होंने कहा कि पाठशाला में जो जानकारी दी जा रही है, किसान उसका लाभ उठाएं। अभोली ब्लॉक में आयोजित किसान पाठशाला में कृषि विशेषज्ञ रामेश्वर सिंह ने किसानों को जागरूक किया। गेहूं और सरसो की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बीज शोधन और जैविक खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया।
विज्ञापन
उप निदेशक कृषि ने रबी की फसलों गेहूं, राई, सरसों और आलू में लगने वाले कीट, रोग और खरपतवारों से बचाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गेहूं में चौड़ी और सकरी पत्ती वाले खरपतवार जैसे गुल्ली डंडा, चटरी, बथुआ, कृष्णनील आदि की समस्या होती है। इसको नियंत्रित करने के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्लूजी 33 ग्राम को 300 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर प्रथम सिंचाई के बाद छिड़काव करें। गेहूं की फसल में मकोय नामक खरपतवार के लिए कारफेंट्राजोन, इथाइल 40 प्रतिशत डीएफ के 50 ग्राम को 500 लीटर में घोल बनाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। राई और सरसों में तापमान में गिरावट होने पर माहो का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए किसान एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5लीटर, डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी एक लीटर, आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी को एक लीटर के लिए छिड़काव करें। आलू में झुलसा रोग से बचाव के लिए 600 से 700 लीटर पानी में कापरऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी ढाई किलो, मैंकोजेब 75 प्रतिशत, डब्ल्यूपी दो किलो और जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी को दो किलो घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें।
विज्ञापन