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असलहे दमदार, रिहर्सल का इंतजार
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:56 AM IST
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ज्ञानपुर। पुलिस के पास असलहों की कमी नहीं है। थ्री नाट थ्री, कार्बाइन, रिवॉल्वर और पिस्टल से लेकर एके-47 जैसे हथियार उपलब्ध हैं। यह बात दीगर है कि उनकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते रहते हैं। इसके पीछे असलहों का कम उपयोग, समुचित रखरखाव और प्रशिक्षण की कमी बड़ी वजह है। शायद इसीलिए कई मौकों पर या तो पुलिस के असलहे जवाब दे जाते हैं या फिर पुलिसकर्मी उन्हें चला ही नहीं पाते। दो साल पूर्व पुलिस लाइन में एसपी ने टेस्ट लिया था, जिसमें कई एसआई और सिपाही उसमें फेल हो गए थे। संभल जिले के असमोली में पिछले दिनों बदमाशों के साथ मुठभेड़ के दौरान दरोगा के पिस्टल से गोली नहीं चलने की घटना ने पुलिस महकमे की किरकिरी कराई। जिले में भी अगर बदमाशों का पुलिस से मुठभेड़ हुई तो संभल जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पुलिस के पास पिस्टल, रिवाल्वर, कार्बाइन और एके- 47 जैसे आधुनिक असलहे उपलब्ध हैं। लेकिन समय-समय पर समुचित प्रशिक्षण न होने के कारण थानों के मालखाने में असलहे रखे-रखे जंग खाने लगे हैं। वहीं जिले में तकरीबन 5100 लोगों के पास पिस्टल, रिवाल्वर, बंदूक और राइफल के लाइसेंस हैं। एएसपी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से पुलिसकर्मियों के पास पिस्टल, रिवाल्वर, कार्बाइन और एके-47 रहती है। ट्रेनिंग सेंटर पर सभी को असलहा चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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