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बेजुबानों पर सर्दी का सितम, 200 पशु बीमार
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अभोली के असईपुर अस्थायी गोशाला में खुले में रखे गए पशु।
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। बेजुबानों पर सर्दी का सितम भारी पड़ रहा है। सुरक्षा और देखरेख का अभाव होने से 21 अस्थायी गौशालाओं में करीब 200 मवेशी बीमार हैं। जबकि असईपुर में पांच दिन में 10 मवेशियों की जान चली गई। सूखे पुआल से गोवंश का पेट भरा जा रहा है। जिससे उनकी हालत और भी बदतर हो जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में गोसंरक्षण शामिल है। समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के तहत गोसंरक्षण के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम भी उठाए गए हैं। इसके बाद भी गोशालाओं के रखरखाव में उदासीनता बरती जा रही है। खामियाजा गोवंशीय पशु उठाने को मजबूर हैं। रविवार को अमर उजाला ने ज्ञानपुर के पूरेरजा और अभोली के असईपुर स्थित गौ संरक्षण केंद्र की पड़ताल किया तो स्थिति काफी खराब दिखी। ज्ञानपुर के पूरेरजा गौशाला में 60 से 70 मवेशी थे। उनके खाने के लिए सिर्फ सूखा पुआल मिला। चहारदीवारी न होने से ठंड से मवेशी परेशान दिखे। देखरेख न होने से 20 से अधिक मवेशी बीमार मिले।
ग्राम प्रधान अक्षय पाठक का कहना है कि बजट नहीं मिलने से कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही। अभोली संवाददाता के अनुसार, असईपुर अस्थाई गोशाला में देखरेख के लिए कोई नहीं था। राम भरोसे ही मवेशी मिले। ग्रामीण देव नारायण ने बताया कि पांच दिनों में 10 मवेशियों की मौत हो गई जबकि कई बीमार हैं। मृत मवेशियों को चारागाह की जमीन में गाड़ दिया गया। यह तो दो गोशाला की बानगी भर है। कमोबेश 19 अन्य अस्थायी गौशालाओं की हालत ऐसी ही है। कहीं भी ठंड से बचाव संग खाने की जरूरी सुविधा नहीं है। बताते चलें कि 21 अस्थायी और दो स्थायी गौशाला में करीब 3300 मवेशी हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि मवेशियों के मौत के बारें में कोई जानकारी नहीं है। बीमार मवेशियों के उपचार के लिए टीमें लगाई गई हैं।
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इनसेट
अब तक खर्च हो चुके सात करोड़
ज्ञानपुर। गोवंश सरंक्षण पर गुजरे तीन साल में करीब सात करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब भी बजट का रोना गो संचालक रो रहे हैं। पूरेरजा के संचालक अक्षय पाठक ने कहा कि छह महीने से पैसा नहीं मिला है। दान में मिले पुआल को आश्रय स्थल पर भेजा गया है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में गोसंरक्षण शामिल है। समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के तहत गोसंरक्षण के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम भी उठाए गए हैं। इसके बाद भी गोशालाओं के रखरखाव में उदासीनता बरती जा रही है। खामियाजा गोवंशीय पशु उठाने को मजबूर हैं। रविवार को अमर उजाला ने ज्ञानपुर के पूरेरजा और अभोली के असईपुर स्थित गौ संरक्षण केंद्र की पड़ताल किया तो स्थिति काफी खराब दिखी। ज्ञानपुर के पूरेरजा गौशाला में 60 से 70 मवेशी थे। उनके खाने के लिए सिर्फ सूखा पुआल मिला। चहारदीवारी न होने से ठंड से मवेशी परेशान दिखे। देखरेख न होने से 20 से अधिक मवेशी बीमार मिले।
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ग्राम प्रधान अक्षय पाठक का कहना है कि बजट नहीं मिलने से कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही। अभोली संवाददाता के अनुसार, असईपुर अस्थाई गोशाला में देखरेख के लिए कोई नहीं था। राम भरोसे ही मवेशी मिले। ग्रामीण देव नारायण ने बताया कि पांच दिनों में 10 मवेशियों की मौत हो गई जबकि कई बीमार हैं। मृत मवेशियों को चारागाह की जमीन में गाड़ दिया गया। यह तो दो गोशाला की बानगी भर है। कमोबेश 19 अन्य अस्थायी गौशालाओं की हालत ऐसी ही है। कहीं भी ठंड से बचाव संग खाने की जरूरी सुविधा नहीं है। बताते चलें कि 21 अस्थायी और दो स्थायी गौशाला में करीब 3300 मवेशी हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि मवेशियों के मौत के बारें में कोई जानकारी नहीं है। बीमार मवेशियों के उपचार के लिए टीमें लगाई गई हैं।
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अब तक खर्च हो चुके सात करोड़
ज्ञानपुर। गोवंश सरंक्षण पर गुजरे तीन साल में करीब सात करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब भी बजट का रोना गो संचालक रो रहे हैं। पूरेरजा के संचालक अक्षय पाठक ने कहा कि छह महीने से पैसा नहीं मिला है। दान में मिले पुआल को आश्रय स्थल पर भेजा गया है।