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एलआईसी पर 2.86 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश
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ज्ञानपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम को दो लाख 86 हजार रुपये पीड़ित महिला को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। तय समय तक भुगतान न होने पर एलआईसी को 2019 से नौ प्रतिशत ब्याज जोड़कर रकम अदा करनी पड़ेगी।
पार्वती देवी पत्नी स्वॅ. कल्लू लाल विश्वकर्मा निवासी बाजार सरदार खां भदोही ने 26 अगस्त 2019 को आयोग में परिवाद दाखिल किया था। इसमें बताया कि उसके पति ने न्यू मनी बैंक प्लान के तहत 26 जून 2017 को अभिकर्ता बिहारी लाल मौर्य से पालिसी ली। इसका टर्म 15 वर्ष था। अभिकर्ता के माध्यम से सभी औपचारिकता पूर्ण की गई। इसमें उसे नामिनी बनाया गया। बीमा 28 मई 2037 को पूर्ण होने वाली थी। उसके पति ने दो लाख 25 हजार का बीमा कराया था। पालिसी की किस्त भरी गई। 19 नवंबर 2017 को उसके पति कल्लू विश्वकर्मा की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में दिखाने पर पता चला कि मलेरिया हो गया है। 26 नवंबर 2017 को ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज कर दिया गया। 15 जनवरी 2018 को एक माह की बीमारी में ही उनकी मृत्यु हो गई।
पॉलिसी की नामिनी के तौर पर उसने सभी कागजात पूर्ण कर बीमा कंपनी के पास प्रस्तुत किया। लेकिन बीमा कंपनी ने कहा कि पॉलिसीधारक पहले से बीमार थे, जिसके कारण क्लेम नहीं दिया जा सकेगा। उसके बाद बीमा कंपनी के अलग-अलग कार्यालय में चक्कर लगाने के बाद भी उसे लाभ नहीं दिया गया। कई बिंदुओं का परीक्षण करने के बाद आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे ने शनिवार को परिवाद को स्वीकार करते हुए एलआईसी को दो लाख 81 हजार 250 और एवं वाद व्यय क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार अदा करने का आदेश दिया। यह भी कहा कि निगम की ओर से समय से भुगतान नहीं किया गया तो संपूर्ण धनराशि पर नौ प्रतिशत ब्याज लगाकर 26 अगस्त 2018 से वसूली की जाएगी।
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पार्वती देवी पत्नी स्वॅ. कल्लू लाल विश्वकर्मा निवासी बाजार सरदार खां भदोही ने 26 अगस्त 2019 को आयोग में परिवाद दाखिल किया था। इसमें बताया कि उसके पति ने न्यू मनी बैंक प्लान के तहत 26 जून 2017 को अभिकर्ता बिहारी लाल मौर्य से पालिसी ली। इसका टर्म 15 वर्ष था। अभिकर्ता के माध्यम से सभी औपचारिकता पूर्ण की गई। इसमें उसे नामिनी बनाया गया। बीमा 28 मई 2037 को पूर्ण होने वाली थी। उसके पति ने दो लाख 25 हजार का बीमा कराया था। पालिसी की किस्त भरी गई। 19 नवंबर 2017 को उसके पति कल्लू विश्वकर्मा की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में दिखाने पर पता चला कि मलेरिया हो गया है। 26 नवंबर 2017 को ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज कर दिया गया। 15 जनवरी 2018 को एक माह की बीमारी में ही उनकी मृत्यु हो गई।
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पॉलिसी की नामिनी के तौर पर उसने सभी कागजात पूर्ण कर बीमा कंपनी के पास प्रस्तुत किया। लेकिन बीमा कंपनी ने कहा कि पॉलिसीधारक पहले से बीमार थे, जिसके कारण क्लेम नहीं दिया जा सकेगा। उसके बाद बीमा कंपनी के अलग-अलग कार्यालय में चक्कर लगाने के बाद भी उसे लाभ नहीं दिया गया। कई बिंदुओं का परीक्षण करने के बाद आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे ने शनिवार को परिवाद को स्वीकार करते हुए एलआईसी को दो लाख 81 हजार 250 और एवं वाद व्यय क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार अदा करने का आदेश दिया। यह भी कहा कि निगम की ओर से समय से भुगतान नहीं किया गया तो संपूर्ण धनराशि पर नौ प्रतिशत ब्याज लगाकर 26 अगस्त 2018 से वसूली की जाएगी।
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