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ढाई माह बाद भी परवान नहीं चढ़ पाया पाली क्लीनिक
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ज्ञानपुर। जिला पशु अस्पताल में छह करोड़ की लागत से निर्माणाधीन पशु पॉली क्लीनिक का काम ढाई माह बाद भी नक्शा नजरी के साथ-साथ पिलर ढलाई तक ही सिमटा हुआ है। हालांकि विभाग का दावा है कि निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
14 फरवरी बृहस्पतिवार को जनपद के नोडल अधिकारी इस निर्माणाधीन पशु पॉली क्लीनिक का निरीक्षण कर सकते हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्था पैक्सफेड कार्यों में तेजी दिखाने में जुटी है। अवगत हो कि पशुपालकों को सभी तरह की सुविधाओं से सुसज्जित बनाने के लिए शासन ने छह करोड़ से पॉली क्लीनिक निर्माण को हरी झंडी देते हुए इसके निर्माण की जिम्मेदारी पैक्सफेड को सौंपी। ढाई माह में मात्र नक्शा नजरी के साथ-साथ पिलर ढलाई का कार्य ही हो सका है। अनुमान लगाया जा रहा है क्लीनिक के तैयार होने में लगभग तीन वर्ष का समय नहीं लगेगा। तब तक आधी-अधूरी व्यवस्थाओं से ही विभाग और पशुपालकों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है। पशु अस्पताल में निर्माणधीन पॉली क्लीनिक नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रवासियों का कहना है कि अस्पताल के ठीक सामने गोपीगंज-ज्ञानपुर सड़क पर छुट्टा पशु डेरा जमा चुके हैंञ ऐसे में नोडल अधिकारी को उचित कदम उठाने चाहिए।
पॉली क्लीनिक का निर्माण जोरों पर है। गुणवत्ता और समय का हरसंभव निगरानी की जा रही है। रही बात पशुओं के संरक्षण की तो जहां भी गोशाला चल रहे हैं वहां पर पशुओं के खाने-पीने, इलाज व शासन से निर्धारित धन को भेजने का प्रयास जारी है।- डॉ. आईए खान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
14 फरवरी बृहस्पतिवार को जनपद के नोडल अधिकारी इस निर्माणाधीन पशु पॉली क्लीनिक का निरीक्षण कर सकते हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्था पैक्सफेड कार्यों में तेजी दिखाने में जुटी है। अवगत हो कि पशुपालकों को सभी तरह की सुविधाओं से सुसज्जित बनाने के लिए शासन ने छह करोड़ से पॉली क्लीनिक निर्माण को हरी झंडी देते हुए इसके निर्माण की जिम्मेदारी पैक्सफेड को सौंपी। ढाई माह में मात्र नक्शा नजरी के साथ-साथ पिलर ढलाई का कार्य ही हो सका है। अनुमान लगाया जा रहा है क्लीनिक के तैयार होने में लगभग तीन वर्ष का समय नहीं लगेगा। तब तक आधी-अधूरी व्यवस्थाओं से ही विभाग और पशुपालकों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है। पशु अस्पताल में निर्माणधीन पॉली क्लीनिक नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रवासियों का कहना है कि अस्पताल के ठीक सामने गोपीगंज-ज्ञानपुर सड़क पर छुट्टा पशु डेरा जमा चुके हैंञ ऐसे में नोडल अधिकारी को उचित कदम उठाने चाहिए।
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पॉली क्लीनिक का निर्माण जोरों पर है। गुणवत्ता और समय का हरसंभव निगरानी की जा रही है। रही बात पशुओं के संरक्षण की तो जहां भी गोशाला चल रहे हैं वहां पर पशुओं के खाने-पीने, इलाज व शासन से निर्धारित धन को भेजने का प्रयास जारी है।- डॉ. आईए खान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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