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छात्र-छात्राओं ने की सवालों की बौछार

Fri, 21 Sep 2018 12:36 AM IST
Updated Fri, 21 Sep 2018 12:36 AM IST
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छात्र-छात्राओं ने की सवालों की बौछार
सुरियावां। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बीपीएमजी पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला में बृहस्पतिवार को पुलिस के आला अफसरों को अपने बीच पाकर छात्र-छात्राओं की जिज्ञासा जाग उठी। एक के बाद एक छात्र-छात्राओं ने सवाल पूछकर पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी हासिल की। 11वीं के छात्र अंकित ने पूछा कि शिकायत करने यानी एफआईआर दर्ज कराने के कितने दिनों बाद रिस्पांस मिलता है। इस पर एएसपी ने कहा कि पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाती है। जल्द से जल्द मामले को कोर्ट में दाखिल करना होता है। खुशी पाठक ने पूछा कि वृद्ध व्यक्ति को ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकता है या नहीं। जवाब मिला लाइसेंस देने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। अनुज गुप्ता ने कहा कि पुलिस लोगों की मदद के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन कई बार यूपी-100 डायल करने के बाद जब पुलिसकर्मी पहुंचते हैं तो लोगों के साथ उनका व्यवहार अच्छा नहीं रहता। एक बार ट्रेन आने के दौरान रेलवे क्रॉसिंग पर गिरे बैरियर को यूपी-100 की गाड़ी ने इमर्जेंसी सायरन बजाकर खुलवाया और उस पार जाकर पान खाने लगे। ऐसे में क्या करना चाहिए। इस पर पुलिस कप्तान ने कहा कि यह पूरी तरह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसा न हो, इसके लिए निर्देश जारी किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर हम सभी अपनी-अपनी गलती को पहचान कर सुधार लें तो बात बन जाए। नौवीं की छात्रा कशिश कौशिक ने इमर्जेंसी में यातायात नियम तोड़ सकते हैं कि नहीं। जवाब मिला बिल्कुल नहीं। कानून को तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।अंजली ने पूछा कि आतंकी हमले की स्थिति में अगर बस चालक बस छोड़कर भाग जाए तो ऐसी स्थिति में बच्चों को क्या करना च-ाहिए। पुलिस कप्तान ने कहा कि सबसे पहले पुलिस को सूचित करने का प्रयास करना चाहिए। यूपी-100 हमेशा याद रखें। अंशुल ने पूछा कि दूसरों को सीट बेल्ट लगाने के लिए चालान काटने वाले पुलिस के लोग खुद सीट बेल्ट लगाकर वाहन क्यों नहीं चलाते। इस पर पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह गलत है। पुलिस विभाग में भी गिनती के लोग गलत हो सकते हैं, जैसा कि हर जगह हैं। लेकिन इसके लिए पूरे विभाग को गलत ठहरा देना ठीक नहीं होगा। सुरक्षा के लिए सभी को सीट बेल्ट लगाना जरूरी है।
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