{"_id":"5c533d5bbdec22737a3677c9","slug":"181548959067-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सत्कर्म सीप का मोती है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सत्कर्म सीप का मोती है
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जंगीगंज। काशी और प्रयाग के मध्य स्थित सेमराधनाथ धाम में आयोजित कल्पवास मेले में देवरिया की महिला संत डॉ. साधन त्रिपाठी ने संगीतमय प्रवचन करते हुए भगवान की विभिन्न लीलाओं का सरपान कराया। कहा कि सत्कर्म सीप के मोती के समान होते हैं।
कथावाचिका ने भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। सच्चे हृदय से ही भगवान को पाने की मंशा पूर्ण हो सकती है। कहा कि प्रभु ने भक्त को अपनी कर्म वीरता दिखाकर रावण वंश का विनाश किया। केवट सरल और करुणामयी प्रेमप्रथा से प्रसन्न हुए। इसीलिए भरत ने श्रीराम नाम पर विश्वास किया। कहा कि राम नाम मात्र से ही लोगों का जीवन सुखमय हो जाता है। डॉ. त्रिपाठी ने कृष्ण की बाल लीलाओं का भी रसपान कराया। कहा कि वंशी वाले का मन से कृष्ण नाम लेते ही मन का पाप निकल जाता है। रघु, दिलीप, राजा शिवि राजा हरिश्चंद्र, दशरथ, हनुमान, विभीषण को सत्यनिष्ठा से ही भगवान के दर्शन हो पाए। कहा कि सत्कर्म सीप का मोती है। ग्रंथ सूत्र में इन्हीं मोतियों की लेखनी पिरोयी जाती है। जिसकी शरण में जाने से जीवन का मार्ग संभलता है। संगीतमयी कथा से श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस दौरान स्वामी करुणा शंकर दास, ग्राम प्रधान रामबली सिंह, बालेश्वर प्रसाद, पंचम सिंह, दिनेश पांडेय, अशोक कुमार, पवन कुमार यादव, भुंवर, महाबीर यादव आदि मौजूद रहे।
कथावाचिका ने भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। सच्चे हृदय से ही भगवान को पाने की मंशा पूर्ण हो सकती है। कहा कि प्रभु ने भक्त को अपनी कर्म वीरता दिखाकर रावण वंश का विनाश किया। केवट सरल और करुणामयी प्रेमप्रथा से प्रसन्न हुए। इसीलिए भरत ने श्रीराम नाम पर विश्वास किया। कहा कि राम नाम मात्र से ही लोगों का जीवन सुखमय हो जाता है। डॉ. त्रिपाठी ने कृष्ण की बाल लीलाओं का भी रसपान कराया। कहा कि वंशी वाले का मन से कृष्ण नाम लेते ही मन का पाप निकल जाता है। रघु, दिलीप, राजा शिवि राजा हरिश्चंद्र, दशरथ, हनुमान, विभीषण को सत्यनिष्ठा से ही भगवान के दर्शन हो पाए। कहा कि सत्कर्म सीप का मोती है। ग्रंथ सूत्र में इन्हीं मोतियों की लेखनी पिरोयी जाती है। जिसकी शरण में जाने से जीवन का मार्ग संभलता है। संगीतमयी कथा से श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस दौरान स्वामी करुणा शंकर दास, ग्राम प्रधान रामबली सिंह, बालेश्वर प्रसाद, पंचम सिंह, दिनेश पांडेय, अशोक कुमार, पवन कुमार यादव, भुंवर, महाबीर यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन