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कुपोषण से जंग में पिछड़े, जिले में 2
Updated Tue, 05 Dec 2017 12:33 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
कुपोषण से जंग में कालीन नगरी पीछे होते जा रही है। तमाम योजनाओं के बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं हो रही है। छह माह पूर्व के सापेक्ष अब तीन हजार से अधिक कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे बढ़ गए हैं। विभाग के त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में करीब 28 हजार 500 कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे चिह्नित हैं।
शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक न मिलना ही कुपोषण हैं। कुपोषण से बच्चों और महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण के रोकथाम के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन धरातल पर जरूरतमंदों तक इसका लाभ न मिलने से कुपोषण में गिरावट नहीं हो रही है। योजनाओं में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गांवों एवं नगरों में गर्भवती धात्रियों और जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोषणयुक्त पंजीरी, दूध, घी की बनी खिचड़ी आदि भी दी जाती है लेकिन हकीकत इससे परे ही है। केंद्रों से मिलने वाली सुविधाएं गिने-चुने लोगों को ही मिल पाता है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रशासन की ओर से कराए गए वजन दिवस में एक लाख 13 हजार बच्चों का वजन कराया गया। इसमें सभी छह ब्लॉकों में जीरो से तीन वर्ष के 11 हजार 899 जबकि तीन से पांच वर्ष के सात हजार 638 मासूम कुपोषित मिले। इसी तरह, जीरो से तीन साल के छह हजार 321 और तीन साल से पांच वर्ष के दो हजार 608 सहित आठ हजार 927 अति कुपोषित बच्चे मिले। दोनों आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 28 हजार 500 से अधिक हो जाएगी।
धात्रियों और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी समय-समय पर की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का दो माह से हड़ताल चल रहा है। इससे योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसमें सुधार की प्रक्रिया चल रही है। - अमृता सिंह, प्रभारी डीपीओ
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कुपोषण से बढ़ जाती है बीमारी
चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कुपोषण से स्त्रियों और बच्चों में कई रोग हो जाता है। बच्चों में सूखा रोग सबसे घातक होता है जबकि महिलाओं में घेंघा, रक्त की कमी होती है। महिलाओं को पत्तेदार सब्जी अधिक खानी चाहिए।
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कुपोषण से जंग में कालीन नगरी पीछे होते जा रही है। तमाम योजनाओं के बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं हो रही है। छह माह पूर्व के सापेक्ष अब तीन हजार से अधिक कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे बढ़ गए हैं। विभाग के त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में करीब 28 हजार 500 कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे चिह्नित हैं।
शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक न मिलना ही कुपोषण हैं। कुपोषण से बच्चों और महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण के रोकथाम के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन धरातल पर जरूरतमंदों तक इसका लाभ न मिलने से कुपोषण में गिरावट नहीं हो रही है। योजनाओं में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गांवों एवं नगरों में गर्भवती धात्रियों और जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोषणयुक्त पंजीरी, दूध, घी की बनी खिचड़ी आदि भी दी जाती है लेकिन हकीकत इससे परे ही है। केंद्रों से मिलने वाली सुविधाएं गिने-चुने लोगों को ही मिल पाता है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रशासन की ओर से कराए गए वजन दिवस में एक लाख 13 हजार बच्चों का वजन कराया गया। इसमें सभी छह ब्लॉकों में जीरो से तीन वर्ष के 11 हजार 899 जबकि तीन से पांच वर्ष के सात हजार 638 मासूम कुपोषित मिले। इसी तरह, जीरो से तीन साल के छह हजार 321 और तीन साल से पांच वर्ष के दो हजार 608 सहित आठ हजार 927 अति कुपोषित बच्चे मिले। दोनों आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 28 हजार 500 से अधिक हो जाएगी।
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धात्रियों और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी समय-समय पर की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का दो माह से हड़ताल चल रहा है। इससे योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसमें सुधार की प्रक्रिया चल रही है। - अमृता सिंह, प्रभारी डीपीओ
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कुपोषण से बढ़ जाती है बीमारी
चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कुपोषण से स्त्रियों और बच्चों में कई रोग हो जाता है। बच्चों में सूखा रोग सबसे घातक होता है जबकि महिलाओं में घेंघा, रक्त की कमी होती है। महिलाओं को पत्तेदार सब्जी अधिक खानी चाहिए।