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18 हजार परिवारों को मिलेगा आशियाना
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18 हजार परिवारों को मिलेगा आशियाना
प्रधानमंत्री आवास के नए लाभार्थियों का बना डीपीआर
2015 से अब तक 30 हजार आवास हो चुके हैं स्वीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (नगरीय) के 18 हजार परिवारों को जल्द ही पक्का छत मिल जाएगा। नगरीय विकास अभिकरण विभाग की ओर से डीपीआर (डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बना दी गई है। नए वित्तीय वर्ष में सभी के खाते में पहली किस्त का पैसा आ जाएगा। 2015 से अब तक 30 हजार आवास स्वीकृत हुए है।
केंद्र सरकार की ओर से सभी को पक्का छत मुहैया कराने के लिए चलाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना तेजी नहीं पकड़ रही है। ग्रामीण अंचलों में कुछ हद तक हाल ठीक है, लेकिन शहरी इलाकों में आवास निर्माण राम भरोसे है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2015 से अब तक कुल 30 हजार स्वीकृत हुए, जिसमें 18 हजार आवास का डीपीआर दो माह के अंदर बना है। ऐसे लाभार्थियों को अप्रैल 2020 से लेकर जून तक पहली किस्त के रूप में 50 हजार की पहली किस्त स्वीकृत होगी, हालांकि नगरीय इलाकों में आवासों का निर्माण कच्छप गति से ही चल रहा है। जिससे लाभार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वीकृत आवासों में अब तक मात्र 1670 ही संपूर्ण तरीके से पूर्ण हो सके हैं जबकि करीब छह हजार आवास के छत की ढलाई हुई है और 7500 आवास के छत ढलने है। ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, नई बाजार के ढाई हजार से अधिक लाभार्थी दूसरी और तीसरी किश्त के लिए दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं।
इनसेट
आवास के फेर में हर माह दे रहे किराया
ज्ञानपुर। नगर के बड़ाडीह निवासी शकुंतला देवी, विमला देवी, कुंती, गीता देवी, सुघरा देवी ऐसे लाभार्थी हैं जिन्होंने पक्के आवास की चाह में अपना आशियाना तोड़ दिया। फरवरी 2019 से सभी किराए के भवन में रहती हैं। पहली किस्त के बाद दूसरी किस्त आज तक नहीं मिल सकी। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कमोबेश यही हाल अन्य नगरों की है, जहां दो से ढाई हजार लाभार्थी दूसरी किस्त के इंतजार में बैठे है।
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इनसेट
नगरों में सभासदों की संस्तुति पर सर्वेयर आवास को फाइनल करते हैं। उसके बाद सभी को किस्त जारी की जाती है। एक तय मानक पर निर्माण होने पर किस्त लाभार्थी के खाते में पहुंचती है। 1600 आवास पूर्ण हैं जबकि सात हजार के करीब पूर्ण होने की कगार पर है।
ऊषा त्रिपाठी, डूडा अधिकारी
--------
इनसेट
स्वीकृत आवास 30000
पूर्ण 1672
छत तक बने आवास 7500
ढलाई न होने वाले आवास 6000
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प्रधानमंत्री आवास के नए लाभार्थियों का बना डीपीआर
2015 से अब तक 30 हजार आवास हो चुके हैं स्वीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (नगरीय) के 18 हजार परिवारों को जल्द ही पक्का छत मिल जाएगा। नगरीय विकास अभिकरण विभाग की ओर से डीपीआर (डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बना दी गई है। नए वित्तीय वर्ष में सभी के खाते में पहली किस्त का पैसा आ जाएगा। 2015 से अब तक 30 हजार आवास स्वीकृत हुए है।
केंद्र सरकार की ओर से सभी को पक्का छत मुहैया कराने के लिए चलाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना तेजी नहीं पकड़ रही है। ग्रामीण अंचलों में कुछ हद तक हाल ठीक है, लेकिन शहरी इलाकों में आवास निर्माण राम भरोसे है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2015 से अब तक कुल 30 हजार स्वीकृत हुए, जिसमें 18 हजार आवास का डीपीआर दो माह के अंदर बना है। ऐसे लाभार्थियों को अप्रैल 2020 से लेकर जून तक पहली किस्त के रूप में 50 हजार की पहली किस्त स्वीकृत होगी, हालांकि नगरीय इलाकों में आवासों का निर्माण कच्छप गति से ही चल रहा है। जिससे लाभार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वीकृत आवासों में अब तक मात्र 1670 ही संपूर्ण तरीके से पूर्ण हो सके हैं जबकि करीब छह हजार आवास के छत की ढलाई हुई है और 7500 आवास के छत ढलने है। ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, नई बाजार के ढाई हजार से अधिक लाभार्थी दूसरी और तीसरी किश्त के लिए दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं।
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आवास के फेर में हर माह दे रहे किराया
ज्ञानपुर। नगर के बड़ाडीह निवासी शकुंतला देवी, विमला देवी, कुंती, गीता देवी, सुघरा देवी ऐसे लाभार्थी हैं जिन्होंने पक्के आवास की चाह में अपना आशियाना तोड़ दिया। फरवरी 2019 से सभी किराए के भवन में रहती हैं। पहली किस्त के बाद दूसरी किस्त आज तक नहीं मिल सकी। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कमोबेश यही हाल अन्य नगरों की है, जहां दो से ढाई हजार लाभार्थी दूसरी किस्त के इंतजार में बैठे है।
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नगरों में सभासदों की संस्तुति पर सर्वेयर आवास को फाइनल करते हैं। उसके बाद सभी को किस्त जारी की जाती है। एक तय मानक पर निर्माण होने पर किस्त लाभार्थी के खाते में पहुंचती है। 1600 आवास पूर्ण हैं जबकि सात हजार के करीब पूर्ण होने की कगार पर है।
ऊषा त्रिपाठी, डूडा अधिकारी
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स्वीकृत आवास 30000
पूर्ण 1672
छत तक बने आवास 7500
ढलाई न होने वाले आवास 6000