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लोस चुनाव: दो बार ही फर्स्ट डिवीजन पास हुए वोटर
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ज्ञानपुर। आजादी के बाद से 2014 तक हुए संसदीय चुनावों में केवल दो बार ही मतदाता फर्स्ट डिवीजन से पास हो सके। 1967 और 1998 के चुनावों को छोड़ दिया जाए तो हर बार 44 से 54 फीसदी के बीच ही मतदान का प्रतिशत रहा। 2019 में 44 डिग्री की गर्मी और तपिश के बीच मतदान प्रतिशत बढ़ना कम चुनौतीपूर्ण नहीं माना जा रहा है।
जिले में लोकसभा चुनावों की बात करें तो साल 1951 से अब तक महज दो बार मतदाता 60 फीसद से ज्यादा मतदान कर फर्स्ट डिवीजन पास हुए हैं, जबकि इसके अलावा अन्य चुनावों में स्थिति 58 से 44 फीसद के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही है। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राम लहर, अटल लहर और मोदी लहर में भी भदोही-मिर्जापुर संसदीय सीट और भदोही सीट पर मतदाता प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण नहीं हो सके। आजादी के बाद से लेकर 2004 तक के चुनाव में भदोही की सीट भदोही-मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी, लेकिन 2008 में परिसीमन के बाद 2009 में भदोही अलग सीट हो गई। 2009 में मात्र 43.39 फीसदी मतदान हुआ और मोदी लहर में 2014 में 53.54 फीसदी वोटिंग हो सकी। आयोग से लेकर प्रशासन की ओर से मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए तमाम मुहिम अपनाई जाती है, लेकिन मतदाता प्रथम श्रेणी से पहले ही ठिठक जाते हैं। करीब 70 साल के इतिहास में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में दो बार को छोड़ दिया जाए तो 17 वीं लोकसभा के चुनाव के लिए प्रशासन मतदान को 70 फीसदी के पार ले जाने के लिए जोर लगाए हुए है। इसके लिए स्वीप के जरिए तमाम जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाओं के साथ भी प्रशासन ने मतदान फीसद बढ़ाने को कदमताल किया जा रहा है, हालांकि भीषण गर्मी और उमस के बीच मतदाताओं को बूथों तक ले जाना टेढ़ी खीर साबित होगा।
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जिले में लोकसभा चुनावों की बात करें तो साल 1951 से अब तक महज दो बार मतदाता 60 फीसद से ज्यादा मतदान कर फर्स्ट डिवीजन पास हुए हैं, जबकि इसके अलावा अन्य चुनावों में स्थिति 58 से 44 फीसद के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही है। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राम लहर, अटल लहर और मोदी लहर में भी भदोही-मिर्जापुर संसदीय सीट और भदोही सीट पर मतदाता प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण नहीं हो सके। आजादी के बाद से लेकर 2004 तक के चुनाव में भदोही की सीट भदोही-मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी, लेकिन 2008 में परिसीमन के बाद 2009 में भदोही अलग सीट हो गई। 2009 में मात्र 43.39 फीसदी मतदान हुआ और मोदी लहर में 2014 में 53.54 फीसदी वोटिंग हो सकी। आयोग से लेकर प्रशासन की ओर से मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए तमाम मुहिम अपनाई जाती है, लेकिन मतदाता प्रथम श्रेणी से पहले ही ठिठक जाते हैं। करीब 70 साल के इतिहास में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में दो बार को छोड़ दिया जाए तो 17 वीं लोकसभा के चुनाव के लिए प्रशासन मतदान को 70 फीसदी के पार ले जाने के लिए जोर लगाए हुए है। इसके लिए स्वीप के जरिए तमाम जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाओं के साथ भी प्रशासन ने मतदान फीसद बढ़ाने को कदमताल किया जा रहा है, हालांकि भीषण गर्मी और उमस के बीच मतदाताओं को बूथों तक ले जाना टेढ़ी खीर साबित होगा।
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