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धूमधाम से हुई गोवर्धन पूजा और भइया दूज
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:21 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले में गोवर्धन पूजा और भइया दूज का त्योहार परंपरागत ढंग से मनाया गया। दिवाली के अगले दिन बृहस्पतिवार को गोवर्धन पूजा की गई और शुक्रवार को भइया दूज का पर्व मनाया गया। तमाम सार्वजनिक स्थलों पर बेदियां बनाकर महिलाओं ने गोबर से बनी गोवर्धन की प्रतिमा के समक्ष फूल-माला और प्रसाद चढ़ाकर मंगल कामना की। साथ ही बहनों ने भाइयों की सलामती के लिए भइया दूज का त्योहार मनाया।
द्वापर युग से चलन में आई गोवर्धन पूजा का खास महात्म्य है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है। मान्यता है कि एक बार अहंकार में चूर इंद्र ने सात दिनों तक लगातार बारिश शुरू कर दी। इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुलियों पर विशाल गोवर्धन पर्वत को ही उठा लिया और इंद्र के कोप से लोगों की रक्षा की। उसके बाद से गोवर्धन पूजा की जाने लगी। बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने जगह-जगह गोबर की प्रतिमा बनाकर प्रसाद और पूजा सामग्री अर्पित की। इस दौरान कहानियां सुनाने की परंपरा भी निभाई गई। लाई और चीनी से बनी मिठाई का प्रसाद चढ़ाकर बंधु-बांधवों में वितरित किया गया। शुक्रवार को सुबह से ही बहनों ने अपने भाई की सलामती के लिए भइया दूज की तैयारी शुरू कर दी। पूूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को पूजा के बाद भाई के हाथों दूध-लावा ग्रहण कर व्रत का पारण किया। मान्यता है कि इस दिन बहनें अपने भाई को शापित करती हैं और उन्हें कोसती हैं। इससे उनकी आयु लंबी होती है। यही वजह थी कि शुक्रवार को दोपहर बाद ज्ञानपुर के हरिहरनाथ धाम समेत तमाम सार्वजनिक स्थलों और सरोवरों के किनारे महिलाओं और युवतियों ने भइया दूज का पूजन किया। इसके बाद भगवान से अपने भाई की सलामती के लिए प्रार्थना की। इसके अलावा भदोही, गोपीगंज, सुरियावां, औराई, जंगीगंज, सीतामढ़ी, ऊंज, चौरी समेत जिलेभर में भइया दूज का त्योहार धूमधाम से मनाया गया।
द्वापर युग से चलन में आई गोवर्धन पूजा का खास महात्म्य है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है। मान्यता है कि एक बार अहंकार में चूर इंद्र ने सात दिनों तक लगातार बारिश शुरू कर दी। इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुलियों पर विशाल गोवर्धन पर्वत को ही उठा लिया और इंद्र के कोप से लोगों की रक्षा की। उसके बाद से गोवर्धन पूजा की जाने लगी। बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने जगह-जगह गोबर की प्रतिमा बनाकर प्रसाद और पूजा सामग्री अर्पित की। इस दौरान कहानियां सुनाने की परंपरा भी निभाई गई। लाई और चीनी से बनी मिठाई का प्रसाद चढ़ाकर बंधु-बांधवों में वितरित किया गया। शुक्रवार को सुबह से ही बहनों ने अपने भाई की सलामती के लिए भइया दूज की तैयारी शुरू कर दी। पूूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को पूजा के बाद भाई के हाथों दूध-लावा ग्रहण कर व्रत का पारण किया। मान्यता है कि इस दिन बहनें अपने भाई को शापित करती हैं और उन्हें कोसती हैं। इससे उनकी आयु लंबी होती है। यही वजह थी कि शुक्रवार को दोपहर बाद ज्ञानपुर के हरिहरनाथ धाम समेत तमाम सार्वजनिक स्थलों और सरोवरों के किनारे महिलाओं और युवतियों ने भइया दूज का पूजन किया। इसके बाद भगवान से अपने भाई की सलामती के लिए प्रार्थना की। इसके अलावा भदोही, गोपीगंज, सुरियावां, औराई, जंगीगंज, सीतामढ़ी, ऊंज, चौरी समेत जिलेभर में भइया दूज का त्योहार धूमधाम से मनाया गया।
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