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पिकअप में लदा अनाज पकड़ा, 1
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ज्ञानपुर। जमुनीपुर अठगवां के कपूरीपट्टी गांव के पास बुधवार रात 10 बजे चौकी पुलिस ने राशन लदे एक पिकअप वाहन को रोक लिया। तलाशी के दौरान कोटे की बोरियों में भरे गेहूं और चावल को देख पिकअप को चौकी लेकर गए। करीब 18 घंटे बाद पूर्ति विभाग की ओर से पकड़े गए वाहन में सरकारी गेहूं न होकर किसी किसान का बताने पर उसे छोड़ा गया।
गरीबों को सस्ते दर पर गेहूं और चावल उपलब्ध कराने के लिए कोटे की दुकान संचालित है। जिले के सबसे बड़े गांवों में शामिल जमुनीपुर अठगवां के राजस्व गांव कपूरीपट्टी के पास बुधवार रात एक पिकअप वाहन गुजर रहा था। चौकी पुलिस ने उसे रोककर छानबीन की तो उसमें करीब 50 सरकारी बोरियों में गेहूं-चावल भरा था। कोटे की दुकान का अनाज बेचने के अंदेशे में पुलिस ने उसे अपने कब्जे में ले लिया। बृहस्पतिवार की सुबह पूर्ति विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो मामले में दूसरा मोड़ आ गया। जैसे-जैसे समय गुजरा मामला भी ढीला होता गया। कोटेदार और पूर्ति निरीक्षक के बीच तालमेल ऐसा बैठा कि जिस अनाज को कोटे का माना जा रहा था वह किसान का हो गया।
चौकी इंचार्ज अजय मिश्रा ने कहा कि बोरियां कोटे की दुकान की लग रही थी, जिसके आधार पर उसे पकड़ा गया था। पूर्ति विभाग की ओर से लिखकर दिया गया कि अनाज कोटे का नहीं है तो छोड़ दिया गया। पूर्ति निरीक्षक विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जो बोरियां मिली हैं, वह सील नहीं थी, जिससे उसे कोटे का अनाज नहीं माना जा सकता। स्टाक रजिस्टर आदि सही मिलने पर उसे छोड़ा गया। डीएसओ अमित तिवारी ने प्रकरण से अनभिज्ञता जताई। विभागीय सूत्रों की मानें तो पिकअप वाहन से बरामद अनाज कोटे की दुकान का ही था, लेकिन विभाग ने इसे दूसरी तरफ मोड़ दिया। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। उसको दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।
गरीबों को सस्ते दर पर गेहूं और चावल उपलब्ध कराने के लिए कोटे की दुकान संचालित है। जिले के सबसे बड़े गांवों में शामिल जमुनीपुर अठगवां के राजस्व गांव कपूरीपट्टी के पास बुधवार रात एक पिकअप वाहन गुजर रहा था। चौकी पुलिस ने उसे रोककर छानबीन की तो उसमें करीब 50 सरकारी बोरियों में गेहूं-चावल भरा था। कोटे की दुकान का अनाज बेचने के अंदेशे में पुलिस ने उसे अपने कब्जे में ले लिया। बृहस्पतिवार की सुबह पूर्ति विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो मामले में दूसरा मोड़ आ गया। जैसे-जैसे समय गुजरा मामला भी ढीला होता गया। कोटेदार और पूर्ति निरीक्षक के बीच तालमेल ऐसा बैठा कि जिस अनाज को कोटे का माना जा रहा था वह किसान का हो गया।
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चौकी इंचार्ज अजय मिश्रा ने कहा कि बोरियां कोटे की दुकान की लग रही थी, जिसके आधार पर उसे पकड़ा गया था। पूर्ति विभाग की ओर से लिखकर दिया गया कि अनाज कोटे का नहीं है तो छोड़ दिया गया। पूर्ति निरीक्षक विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जो बोरियां मिली हैं, वह सील नहीं थी, जिससे उसे कोटे का अनाज नहीं माना जा सकता। स्टाक रजिस्टर आदि सही मिलने पर उसे छोड़ा गया। डीएसओ अमित तिवारी ने प्रकरण से अनभिज्ञता जताई। विभागीय सूत्रों की मानें तो पिकअप वाहन से बरामद अनाज कोटे की दुकान का ही था, लेकिन विभाग ने इसे दूसरी तरफ मोड़ दिया। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। उसको दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।
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