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बजट: चुनावी चाशनी में डूबे बजट से जीता दिल
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ज्ञानपुर। मोदी सरकार ने अपने अंतिम बजट को चुनावी चाशनी में डुबोकर जनता के समक्ष पेश कर दिया। बजट में किसानों और नौकरीपेशा लोगों के लिए सौगातों का पिटारा खोलकर भले ही सियासी दांव चले गए हों, लेकिन आयकर छूट का स्लैब ढाई से बढ़ाकर पांच लाख करने और किसानों के खाते में सालाना छह हजार की मदद भेजने के एलान से जिले का बड़ा तबका मोदी की जय-जयकार करने लगा है।
आम बजट को लेकर शुक्रवार को सुबह से ही लोगों में उत्सुकता थी। टीवी चैनलों पर होने वाले बजट से जुड़े डिबेट और चर्चाओं पर लोगों की निगाहें लगीं थीं। 11 बजे जैसे ही केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में बजट भाषण शुरू किया, लोग उस पर केंद्रित हो गए। पौने दो घंटे के पीयूष गोयल के बजट भाषण को लोगों ने ध्यान से सुना। छह हजार सालाना आर्थिक मदद देने की घोषणा पर किसानों को मुस्कुराने का मौका मिल गया। कहा इससे थोड़ी राहत मिलेगी। हालांकि कई किसान इसे नाकाफी बताते रहे। उनका कहना था कि खाद, बीज, सिंचाई और मवेशियों से फसलों के नुकसान की बुनियादी समस्याओं पर भी मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए था। इसके अलावा फसल बीमा और क्षतिपूर्ति में कदम-कदम पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अचूक योजना का क्रियान्वयन और बजट अंतिम आम बजट में होना चाहिए था। पांच लाख तक की आय को करमुक्त करने पर नौकरीपेशा वर्ग झूम उठा। लोगों का कहना था कि इससे काफी राहत मिलेगी। पहले केवल ढाई लाख तक की आय करमुक्त थी। साथ ही महिलाओं को बैंक से मिलने वाले ब्याज को 40 हजार तक करमुक्त करने से आधी आबादी ने भी राहत महसूस की। उनका कहना है कि इससे महिलाओं में बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) जगत बजट को लेकर मंथन में जुट गया। 59 मिनट में एक करोड़ तक के ऋण की स्वीकृति मिलने की सौगात प्रधानमंत्री ने पहले ही दे दी थी। अब पंजीकृत एमएसएमई कारोबारियों को जीएसटी में दो प्रतिशत छूट का एलान किया गया है। अन्य नफा-नुकसान को लेकर कारोबार जगत में मंथन शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि बजट को समझा जा रहा है।
आम बजट को लेकर शुक्रवार को सुबह से ही लोगों में उत्सुकता थी। टीवी चैनलों पर होने वाले बजट से जुड़े डिबेट और चर्चाओं पर लोगों की निगाहें लगीं थीं। 11 बजे जैसे ही केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में बजट भाषण शुरू किया, लोग उस पर केंद्रित हो गए। पौने दो घंटे के पीयूष गोयल के बजट भाषण को लोगों ने ध्यान से सुना। छह हजार सालाना आर्थिक मदद देने की घोषणा पर किसानों को मुस्कुराने का मौका मिल गया। कहा इससे थोड़ी राहत मिलेगी। हालांकि कई किसान इसे नाकाफी बताते रहे। उनका कहना था कि खाद, बीज, सिंचाई और मवेशियों से फसलों के नुकसान की बुनियादी समस्याओं पर भी मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए था। इसके अलावा फसल बीमा और क्षतिपूर्ति में कदम-कदम पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अचूक योजना का क्रियान्वयन और बजट अंतिम आम बजट में होना चाहिए था। पांच लाख तक की आय को करमुक्त करने पर नौकरीपेशा वर्ग झूम उठा। लोगों का कहना था कि इससे काफी राहत मिलेगी। पहले केवल ढाई लाख तक की आय करमुक्त थी। साथ ही महिलाओं को बैंक से मिलने वाले ब्याज को 40 हजार तक करमुक्त करने से आधी आबादी ने भी राहत महसूस की। उनका कहना है कि इससे महिलाओं में बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) जगत बजट को लेकर मंथन में जुट गया। 59 मिनट में एक करोड़ तक के ऋण की स्वीकृति मिलने की सौगात प्रधानमंत्री ने पहले ही दे दी थी। अब पंजीकृत एमएसएमई कारोबारियों को जीएसटी में दो प्रतिशत छूट का एलान किया गया है। अन्य नफा-नुकसान को लेकर कारोबार जगत में मंथन शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि बजट को समझा जा रहा है।
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