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कथा के अंतिम दिन श्रोताओं की उमड़ी भीड़
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चौरी। क्षेत्र के मानिकपुर गांव में नारायण सेवा परिवार की ओर से चल रहे पांच दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के अंतिम दिन मंगलवार को श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। कथा वाचक अजय भाई रघुराई ने जब हनुमान के समुद्र यात्रा का वर्णन किया तो कथा प्रेमियों ने गगनभेदी जयकारा लगाकर वातावरण को धार्मिकमय बना दिया।
रघुराई महाराज ने कहा कि जामवंत ने जब हनुमान को उनकी शक्तियों और पवन पुत्र होने का अहसास कराया तो वह हर्षित हो उठे। समुद्र तट किनारे सभी वानरी सेना को कंदमूल फल खाकर इंतजार करने की बात कहते हुए हनुमान माता सीता की तलाश में लंका की ओर उड़ गए। रास्ते में जाते समय मेनका पर्वत पर आराम फरमाने को कहा गया पर हनुमान ने बड़े भावपूर्वक उत्तर देते हुए कहा कि जब तक मैं श्रीराम को कार्य पूर्ण न कर लूं मेरे जीवन में विश्राम की कोई जगह नहीं है। आगे चलने पर देवताओं ने भी उनकी परीक्षा लेने के लिए सुरसा नामक दानवी को भेज दिया। जो हनुमान को खाने की कोशिश की पर खा नहीं सकी और हनुमान उसके मुख में जाकर वापस चले आए। लंका में पहुंच कर हनुमान सीता को प्रभु श्रीराम की अंगूठी देते हैं। वापस लौटते समय माता सीता हाथ की चूड़ामणि को उतार कर हनुमान को देती हैं।
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रघुराई महाराज ने कहा कि जामवंत ने जब हनुमान को उनकी शक्तियों और पवन पुत्र होने का अहसास कराया तो वह हर्षित हो उठे। समुद्र तट किनारे सभी वानरी सेना को कंदमूल फल खाकर इंतजार करने की बात कहते हुए हनुमान माता सीता की तलाश में लंका की ओर उड़ गए। रास्ते में जाते समय मेनका पर्वत पर आराम फरमाने को कहा गया पर हनुमान ने बड़े भावपूर्वक उत्तर देते हुए कहा कि जब तक मैं श्रीराम को कार्य पूर्ण न कर लूं मेरे जीवन में विश्राम की कोई जगह नहीं है। आगे चलने पर देवताओं ने भी उनकी परीक्षा लेने के लिए सुरसा नामक दानवी को भेज दिया। जो हनुमान को खाने की कोशिश की पर खा नहीं सकी और हनुमान उसके मुख में जाकर वापस चले आए। लंका में पहुंच कर हनुमान सीता को प्रभु श्रीराम की अंगूठी देते हैं। वापस लौटते समय माता सीता हाथ की चूड़ामणि को उतार कर हनुमान को देती हैं।
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