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लापरवाही में लटका 22 हजार उपभोक्ताओं का राशन
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ज्ञानपुर। गरीबों के राशन में घपलेबाजी करने के लिए कोटेदारों की मनमानी ने जिले के 10 हजार उपभोक्ताओं के लिए संकट पैदा कर दिया है। आधार नंबर को कई जगह जोड़ने से निदेशालय ने डुप्लीकेट मानते हुए आधार को निरस्त कर दिया। जिससे 22 हजार यूनिट राशन कई माह से मिलना बंद हो गया है। कार्डधारक कोटेदार से लेकर पूर्ति कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कागजों में सुधार नहीं हो पा रहा है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कोटे की दुकानों के माध्यम से गरीबों को सस्ते दर पर गेहूं-चावल मुहैया कराया जाता है। पूर्व में ऑनलाइन व्यवस्था न होने से कोटेदार गरीबों के राशन को बाजार में बेच देते थे। योजना को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन कर दिया गया लेकिन कोटेदार अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आ रहे हैं। सभी कार्ड धारकों को आधार लिंक करवाना जरूरी था। जिसके लिए 725 कोटे के दुकानदारों ने गांव-गांव जाकर सभी कार्ड धारकों का आधार लेकर संबंधित साइट पर जोड़ा लेकिन इसमें भी गोलमाल कर दिया। आधार से लिंक कराने के दौरान कोटेदारों ने एक-एक आधार को कई स्थान से जोड़ दिया। निदेशालय की ओर से सत्यापन किया गया तो 22 हजार यूनिट डुप्लीकेट मिले। निदेशालय ने ऐसे यूनिट को निरस्त कर दिया, जिससे उन्हें राशन मिलना बंद हो गया है। सुधार के लिए करीब तीन-चार माह से उपभोक्ता पूर्ति कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सुधार नहीं हो पा रहा है। बताते चलें कि जिले में कुल 11 लाख 28 हजार यूनिट राशन का वितरण होता है। जिसमें पात्र गृहस्थी और अंत्योदय सभी शामिल है।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कोटे की दुकानों के माध्यम से गरीबों को सस्ते दर पर गेहूं-चावल मुहैया कराया जाता है। पूर्व में ऑनलाइन व्यवस्था न होने से कोटेदार गरीबों के राशन को बाजार में बेच देते थे। योजना को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन कर दिया गया लेकिन कोटेदार अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आ रहे हैं। सभी कार्ड धारकों को आधार लिंक करवाना जरूरी था। जिसके लिए 725 कोटे के दुकानदारों ने गांव-गांव जाकर सभी कार्ड धारकों का आधार लेकर संबंधित साइट पर जोड़ा लेकिन इसमें भी गोलमाल कर दिया। आधार से लिंक कराने के दौरान कोटेदारों ने एक-एक आधार को कई स्थान से जोड़ दिया। निदेशालय की ओर से सत्यापन किया गया तो 22 हजार यूनिट डुप्लीकेट मिले। निदेशालय ने ऐसे यूनिट को निरस्त कर दिया, जिससे उन्हें राशन मिलना बंद हो गया है। सुधार के लिए करीब तीन-चार माह से उपभोक्ता पूर्ति कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सुधार नहीं हो पा रहा है। बताते चलें कि जिले में कुल 11 लाख 28 हजार यूनिट राशन का वितरण होता है। जिसमें पात्र गृहस्थी और अंत्योदय सभी शामिल है।
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