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ग्रामीण क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा कालोनाइजरों का माया जाल
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ज्ञानपुर। नगरीय क्षेत्रों के बाद अब धीरे-धीरे कॉलोनाइजरों का मायाजाल ग्रामीण क्षेत्रों की ओर भी बढ़ता जा रहा है। बिना स्वीकृति के कालोनी बसाने के नाम पर प्लाटिंग का बोर्ड लगाना राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। बानगी के लिए विकास खंड डीघ के सूफीनगर-मैलौना, सुधवैं, वहिदानगर जैसे प्रमुख मार्गों पर लगे कॉलोनाइजरों के बोर्ड देखे जा सकते हैं।
गत दिनों गोपीगंज-ज्ञानपुर मार्ग स्थित मुख्य नहर पुलिया के पास और सिंहपुर, सोनखरी, शिवनगर जैसे स्थानों पर औने-पौने दाम पर काश्तकारी की जमीन कॉलोनाइजरों ने लेकर बड़ा मुनाफा कमाने की मंशा को बढ़ाते रहे। जिले में ज्यादातर कॉलोनाइजर पंजीकृत नहीं है। जबकि दर्जनों की संख्या में कॉलोनाइजर जगह-जगह प्लॉट की खरीद-फरोख्त का धंधा कर रहे हैं। मामला एसडीएम ज्ञानपुर तक पहुंचा तो धंधे में लगे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। ओहदेदारों की दौड़भाग और शासन सत्ता में अपनी पहचान कायम रखने का हवाला देते हुए येन-केन प्रकारेण मामले को ठंडे बस्ते में डलवा दिया गया। पुन: अब ऐसे लोगों की नजर ग्रामीण क्षेत्र के प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थल की पहचान कायम रखने वाले मार्गों पर निशाना साधते हुए गुमनामी वाले नामों से अंकित आवासीय प्लाट का बोर्ड लगवाकर महंगी दर पर कॉलोनियां बसाने का काम जोर पकड़ता जा रहा है। इतना ही नहीं मुनाफाखोरी के चक्कर में छोटे-मोटे खेतिहर, काश्तकार इनकी जद में फंस कर अपनी बनी बनाई संपत्ति से हाथ धोते देखे जा सकते हैं।
अस्तित्व खो रहा स्टेशन मार्ग
नेशनल हाईवे संख्या दो से जुड़ा जंगीगंज रेलवे स्टेशन-सूफीनगर मार्ग कॉलोनाइजरों की हरकत से अस्तित्व ही खोने की कगार पर पहुंच गया है। कारण स्पष्ट है, प्लाटिंग के नाम पर कवर की गई जमीनों पर हाईवे से निकलने वाली खराब मिट्टी को कम दामों में क्रय कर ओवरलोड वाहनों से गिरवाई जाने लगी है। पहले से ही खस्ताहाली की मार झेल रहा मार्ग लोड सहन न कर पाने से धंसने की कगार पर है। दूसरी ओर जलनिकासी की समस्या पहले ही नासूर बन चुकी है।
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बड़े कारनामे के खुलासे का इंतजार
ग्रामीण क्षेत्रों की ओर कॉलोनाइजरों के बढ़ते दायरे को संज्ञान में लेते हुए यदि राजस्व विभाग और प्रशासनिक अमला सक्रियता दिखाए तो बड़े कारनामे का खुलासा हो सकता है। कारोबार में संलिप्त लोगों के सूत्रधार भी इसमें कम दोषी नहीं होंगे। जो गैर जनपदों से आकर जमीन का मोल तो कर लेते हैं, लेकिन उनके मोटी रकम लेने के बाद न तो जमीन ही मुहैया कराई जाती है, न ही प्लाट। कुछ दिन बीतने के बाद पंचायत शुरू होते ही काले कारनामों का पर्दाफाश होने लगता है।
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गत दिनों गोपीगंज-ज्ञानपुर मार्ग स्थित मुख्य नहर पुलिया के पास और सिंहपुर, सोनखरी, शिवनगर जैसे स्थानों पर औने-पौने दाम पर काश्तकारी की जमीन कॉलोनाइजरों ने लेकर बड़ा मुनाफा कमाने की मंशा को बढ़ाते रहे। जिले में ज्यादातर कॉलोनाइजर पंजीकृत नहीं है। जबकि दर्जनों की संख्या में कॉलोनाइजर जगह-जगह प्लॉट की खरीद-फरोख्त का धंधा कर रहे हैं। मामला एसडीएम ज्ञानपुर तक पहुंचा तो धंधे में लगे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। ओहदेदारों की दौड़भाग और शासन सत्ता में अपनी पहचान कायम रखने का हवाला देते हुए येन-केन प्रकारेण मामले को ठंडे बस्ते में डलवा दिया गया। पुन: अब ऐसे लोगों की नजर ग्रामीण क्षेत्र के प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थल की पहचान कायम रखने वाले मार्गों पर निशाना साधते हुए गुमनामी वाले नामों से अंकित आवासीय प्लाट का बोर्ड लगवाकर महंगी दर पर कॉलोनियां बसाने का काम जोर पकड़ता जा रहा है। इतना ही नहीं मुनाफाखोरी के चक्कर में छोटे-मोटे खेतिहर, काश्तकार इनकी जद में फंस कर अपनी बनी बनाई संपत्ति से हाथ धोते देखे जा सकते हैं।
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अस्तित्व खो रहा स्टेशन मार्ग
नेशनल हाईवे संख्या दो से जुड़ा जंगीगंज रेलवे स्टेशन-सूफीनगर मार्ग कॉलोनाइजरों की हरकत से अस्तित्व ही खोने की कगार पर पहुंच गया है। कारण स्पष्ट है, प्लाटिंग के नाम पर कवर की गई जमीनों पर हाईवे से निकलने वाली खराब मिट्टी को कम दामों में क्रय कर ओवरलोड वाहनों से गिरवाई जाने लगी है। पहले से ही खस्ताहाली की मार झेल रहा मार्ग लोड सहन न कर पाने से धंसने की कगार पर है। दूसरी ओर जलनिकासी की समस्या पहले ही नासूर बन चुकी है।
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बड़े कारनामे के खुलासे का इंतजार
ग्रामीण क्षेत्रों की ओर कॉलोनाइजरों के बढ़ते दायरे को संज्ञान में लेते हुए यदि राजस्व विभाग और प्रशासनिक अमला सक्रियता दिखाए तो बड़े कारनामे का खुलासा हो सकता है। कारोबार में संलिप्त लोगों के सूत्रधार भी इसमें कम दोषी नहीं होंगे। जो गैर जनपदों से आकर जमीन का मोल तो कर लेते हैं, लेकिन उनके मोटी रकम लेने के बाद न तो जमीन ही मुहैया कराई जाती है, न ही प्लाट। कुछ दिन बीतने के बाद पंचायत शुरू होते ही काले कारनामों का पर्दाफाश होने लगता है।
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