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रावण का अहंकार बना लंका के विनाश का कारण
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ज्ञानपुर। क्षेत्र के गोंसाईं बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को कथा मर्मज्ञ पं. विवेकानंद शास्त्री ने लंका दहन समेत श्रीराम-रावण युद्घ का वर्णन किया। कहा माता सीता का छल पूर्वक हरण ही संपूर्ण लंका के विनाश का कारण बना।
दोपहर से शुरू हुए प्रवचन में कथा वाचक ने सीता स्वयंवर से लेकर सीता हरण तक के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। कथा वचक ने जब सीता हरण और लंका दहन के बारे में सुनाया तो भक्तों की आंखे भर आईं। उन्होंने कहा की रावण सभी वेदों का ज्ञाता होने के साथ ही महान बलशाली भी था। लेकिन वह अपनी शक्ति के अहंकार में छल से माता सीता का हरण किया। जानकारी के बाद मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम वानरी सेना के साथ लंका पहुंचे। यहां भी रावण के पास सम्मान सहित माता सीता को पहुुंचाने का प्रस्ताव भेजा। लेकिन अपने शक्ति के अहंकार में रावण ने श्रीराम को हास्यात्मक बताते हुए ठुकरा दिया। जिसके बाद भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई कर रावण कुल का विनाश करने का निश्चय किया। इस दौरान कृष्ण की झांकी के साथ भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इस मौके पर पप्पू, बब्लू, रवि साहू, सालिकराम, प्रेमचंद्र, शिवनारायण, गुलाबचंद्र, जवाहरलाल, आशा गुप्ता, बाबा तेजप्रताप दास आदि रहे।
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दोपहर से शुरू हुए प्रवचन में कथा वाचक ने सीता स्वयंवर से लेकर सीता हरण तक के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। कथा वचक ने जब सीता हरण और लंका दहन के बारे में सुनाया तो भक्तों की आंखे भर आईं। उन्होंने कहा की रावण सभी वेदों का ज्ञाता होने के साथ ही महान बलशाली भी था। लेकिन वह अपनी शक्ति के अहंकार में छल से माता सीता का हरण किया। जानकारी के बाद मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम वानरी सेना के साथ लंका पहुंचे। यहां भी रावण के पास सम्मान सहित माता सीता को पहुुंचाने का प्रस्ताव भेजा। लेकिन अपने शक्ति के अहंकार में रावण ने श्रीराम को हास्यात्मक बताते हुए ठुकरा दिया। जिसके बाद भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई कर रावण कुल का विनाश करने का निश्चय किया। इस दौरान कृष्ण की झांकी के साथ भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इस मौके पर पप्पू, बब्लू, रवि साहू, सालिकराम, प्रेमचंद्र, शिवनारायण, गुलाबचंद्र, जवाहरलाल, आशा गुप्ता, बाबा तेजप्रताप दास आदि रहे।
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