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कृष्ण भाव में सराबोर हुई दुलही की बारी
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:29 AM IST
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सीतामढ़ी। कोइरौना इलाके के दुलही की बारी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के भक्ति रस में समूचा इलाका सराबोर रहा। गंगोत्री से आए संत डॉ. दुर्गेशाचार्य महराज ने शुक्रवार को भगवान की रहस्यमयी अनुपम लीला की कथा का रसपान कराते हुए कहा कि यदि मनुष्य सभी में परमात्मा का दर्शन करने लगे तो उसके मन के राग, द्वेष, भेदभाव सब मिट जाएंगे और उसका जीवन ‘नंद’ मय बनेगा।
स्वामी जी ने कहा कि जब हम दूसरों को सुख मान-सम्मान देने की भावना मन में लाएंगे, तभी हम यशोदा मां बन पाएंगे और नंद-यशोदा जैसी मनोभावना होने पर ही भगवान श्री कृष्ण जीवन में आकर हमारे घर-गांव को गोकुल-वृंदावन बना देंगे। लीलाधारी श्रीकृष्ण की मनोहारी कथा सुन भक्त भाव विह्वल हो गए। मौजूदा परिस्थितियों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी तो अपने माता-पिता सास-ससुर को ही प्रेम, मान, सम्मान नहीं दे पा रही है। घर-परिवार, भाई, भाभी, देवर, देवरानी, ननद के साथ भेदभाव राग द्वेष की प्रवृत्ति जन्म ले चुकी है। इसलिए हमें अपने भीतर की पूतना अविद्या, माया देवी को दूसरों को दुख देने की प्रवृत्ति मिटानी चाहिए। कहा कि आज के अशांत जीवन में श्री कृष्ण कथा श्रवण करने से इंद्रियां गोपी बनकर भगवान के नाम का ही रसपान करने लगेंगी। तब भक्तवत्सल भगवान श्री कृष्ण काम, क्रोध, लोभ, मोह को चुराकर अपने चरणों की भक्ति में प्रीत करा देंगे। गौ, गंगा, कन्या और पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों का आह्वान करते हुए कहा की पांच हजार वर्ष पूर्व श्री कृष्ण ने पर्यावरण रक्षा का संकल्प लिया था। आज धरती मां, गंगा मां, गौ मां, कन्या, एवं प्रकृति मां संकट में हैं। इन्हें बचाना ही भागवत कथा का मंगल संदेश है। मौके पर केदार नाथ मिश्रा, माता दान मिश्रा, श्यामधर मिश्रा, विंध्यवासिनी मिश्रा, दिनेश मिश्रा, शेषधर मिश्रा, बबलू पांडेय, राम मोहन, दीपक मिश्रा आदि रहे।
स्वामी जी ने कहा कि जब हम दूसरों को सुख मान-सम्मान देने की भावना मन में लाएंगे, तभी हम यशोदा मां बन पाएंगे और नंद-यशोदा जैसी मनोभावना होने पर ही भगवान श्री कृष्ण जीवन में आकर हमारे घर-गांव को गोकुल-वृंदावन बना देंगे। लीलाधारी श्रीकृष्ण की मनोहारी कथा सुन भक्त भाव विह्वल हो गए। मौजूदा परिस्थितियों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी तो अपने माता-पिता सास-ससुर को ही प्रेम, मान, सम्मान नहीं दे पा रही है। घर-परिवार, भाई, भाभी, देवर, देवरानी, ननद के साथ भेदभाव राग द्वेष की प्रवृत्ति जन्म ले चुकी है। इसलिए हमें अपने भीतर की पूतना अविद्या, माया देवी को दूसरों को दुख देने की प्रवृत्ति मिटानी चाहिए। कहा कि आज के अशांत जीवन में श्री कृष्ण कथा श्रवण करने से इंद्रियां गोपी बनकर भगवान के नाम का ही रसपान करने लगेंगी। तब भक्तवत्सल भगवान श्री कृष्ण काम, क्रोध, लोभ, मोह को चुराकर अपने चरणों की भक्ति में प्रीत करा देंगे। गौ, गंगा, कन्या और पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों का आह्वान करते हुए कहा की पांच हजार वर्ष पूर्व श्री कृष्ण ने पर्यावरण रक्षा का संकल्प लिया था। आज धरती मां, गंगा मां, गौ मां, कन्या, एवं प्रकृति मां संकट में हैं। इन्हें बचाना ही भागवत कथा का मंगल संदेश है। मौके पर केदार नाथ मिश्रा, माता दान मिश्रा, श्यामधर मिश्रा, विंध्यवासिनी मिश्रा, दिनेश मिश्रा, शेषधर मिश्रा, बबलू पांडेय, राम मोहन, दीपक मिश्रा आदि रहे।
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