फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   पढ़ाई छोड़कर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े ग्रामवासी

पढ़ाई छोड़कर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े ग्रामवासी

Sat, 12 Aug 2017 12:47 AM IST
Updated Sat, 12 Aug 2017 12:47 AM IST
विज्ञापन
पढ़ाई छोड़कर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े ग्रामवासी
लालानगर। आजादी के संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वालों में बृजभूषण मिश्र ‘ग्रामवासी’ का नाम शीर्ष क्रांतिकारियों में शुमार है। जलियावाला बाग की दिल दहला देने वाली घटना ने ‘ग्रामवासी’ को इतना व्यथित किया कि सबकुछ छोड़कर वह आंदोलन में कूद पड़े और सच्चा-स्वतंत्र भारत के निर्माण के सपने को मूर्त रूप देने के लिए जी जान से जुट गए। स्वदेशी के लिए आंदोलन की खातिर जेल में सजा काटने के दौरान उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से भी हुई।
विज्ञापन


बृजभूषण मिश्र ‘ग्रामवासी’ का जन्म 27 अगस्त 1866 को गोपीगंज नगर के पश्चिम मोहाल में हुआ था। उस समय यह स्थान मिर्जापुर जिले में था। बाद में यह क्षेत्र काशी राज्य में सम्मिलित हुआ। बृजभूषण मिश्र जब तीन महीने के थे, तभी उनकी माता का देहांत हो गया। उनका लालन-पालन दादी रुक्मिणी देवी ने किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा इमदादी स्कूल गोपीगंज में हुई। इसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई की। 1920 में असहयोग आंदोलन के समय वह सबकुछ छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए।
विज्ञापन


‘ग्रामवासी’ के भतीजे गोपाल कृष्ण मिश्रा बताते हैं कि जलियावाला बाग हत्याकांड के प्रतिरोध में देश को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराकर सच्चा-स्वतंत्र भारत बनाने का संकल्प लेकर वह असहयोग आंदोलन में सम्मिलित हुए। 1921 में उन्होंने स्वदेश संघ की स्थापना की। स्वदेशी विचारधारा को बल प्रदान करने के लिए तीन मई 1922 को उन्होंने अपने चचेरे भाई की विदेशी वस्त्र की दूकान पर धरना दिया। इस पर क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट की धारा 2 के अंतर्गत उनकी गिरफ्तारी हुई, जिसमें 15 माह की कैद और 300 जुर्माना हुआ। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की कैद उन्होंने वाराणसी के चौकाघाट जेल में काटी। जेल में उनकी मुलाकात क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद से हुई। जेल से निकलने के बाद एक समाचार पत्र निकालने के संबंध में उन्होंने मोतीलाल नेहरू से मुलाकात की, जहां निराशाजनक जवाब मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन


1923 में उन्होंने पाक्षिक पत्र ग्रामवासी का गोपीगंज से प्रकाशन शुरू किया। 1930 में ग्रामवासी जी को नहर रेट वृद्धि के आंदोलन में ज्ञानपुर जेल में बंद होना पड़ा। 1941 में आठ मई को महात्मा गांधी से वर्धा सेवाग्राम मिलने गए और लौटकर आने पर मिर्जापुर में सात महीने नजरबंद रहने के बाद नवंबर में रिहा हुए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के प्रचार में दुद्धीे से वापस लौटने पर 17 महीने फिर नजरबंद रहे। 1952 में दुद्धी क्षेत्र के विधायक भी रहे। 1952 में भूदान समिति के जिला संचालक बने। इस दौरान 22000 एकड़ जमीन एकत्रित की और पंडित नेहरू के हाथों किसानों को जमीन पट्टा करवाया। उनके जीवन के पांच मुख्य मकसद रहे। इनमें गोवध बंदी, मदिरा बंदी, अश्लील प्रदर्शन बंदी, हिंदी भाषा को प्राथमिकता और लॉटरी बंदी शामिल रहे। बृजभूषण मिश्र की सात संतानें हैं, जिसमें चार पुत्र उमाकांत, श्रीकांत, कमलाकांत, कृष्णकांत और तीन पुत्रियां शुभाषा, सुधर्मा एवं शैल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed