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छह माह से खराब पड़ा नलकूप,सिंचाई बाधित
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सुरियाव्रां। सिंचाई बंधु की बैठकों में किसानों की सिंचाई की समस्या से निजात दिलाने का वायदा धरातल पर नहीं उतर पा रहा है। जिम्मेदार लोगों की मनमानी और लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इसका उदाहरण भी सुरियावां क्षेत्र के कुसौड़ा में लगा नलकूप संख्या 352 बखूबी बन रहा है।
किसानों ने आरोप लगाया है कि मात्र तीन दिन चलने के बाद से नलकूप छह महीने बीतने के बाद भी मात्र शोपीस बनकर रह गया है। चार बार मोटर रिपेयर, दो बार मोटर जलने और बोर में मोटर के गिरने और बनकर आने के बाद पंखा जाम हो जाने का रोना रोया जा रहा है। वहीं अगैती और पिछैती के रूप में बोई गई गेहूं की फसलें पहली ही सिंचाई के लिए तरस कर रह गई हैं। यहां तक कि अभी भी अधिसंख्य किसान बुवाई करने के लिए पलेवा तक नहीं कर सके हैं, जो विभागीय कार्यप्रणाली पर तरह-तरह प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस बाबत ग्राम प्रधान सुमन श्रीवास्तव ने विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए स्थलीय निरीक्षण कराकर नलकूप को अवि लंब चालू कराने और लापरवाह बने कर्मचारियों के मिखलाफ भी उचित कदम उठाकर कार्रवाई की मांग की है।
किसानों ने आरोप लगाया है कि मात्र तीन दिन चलने के बाद से नलकूप छह महीने बीतने के बाद भी मात्र शोपीस बनकर रह गया है। चार बार मोटर रिपेयर, दो बार मोटर जलने और बोर में मोटर के गिरने और बनकर आने के बाद पंखा जाम हो जाने का रोना रोया जा रहा है। वहीं अगैती और पिछैती के रूप में बोई गई गेहूं की फसलें पहली ही सिंचाई के लिए तरस कर रह गई हैं। यहां तक कि अभी भी अधिसंख्य किसान बुवाई करने के लिए पलेवा तक नहीं कर सके हैं, जो विभागीय कार्यप्रणाली पर तरह-तरह प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस बाबत ग्राम प्रधान सुमन श्रीवास्तव ने विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए स्थलीय निरीक्षण कराकर नलकूप को अवि लंब चालू कराने और लापरवाह बने कर्मचारियों के मिखलाफ भी उचित कदम उठाकर कार्रवाई की मांग की है।
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