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बाबूसराय की रामलीला
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:20 AM IST
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बाबूसराय। बजरंग रामलीला समिति सारीपुर की रामलीला में शुक्रवार रात राम वनगमन के प्रसंग का मंचन किया गया। पिता के हृदय के टुकड़े श्रीराम को पत्नी समेत वन जाने की लीला देखकर दीर्घा में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
राजा दशरथ दर्पण में अपने सफेद बाल देखकर समझ जाते हैं कि मेरी वृद्धावस्था आ गई है। इसलिए राम का राज्याभिषेक कर देना चाहिए। वह गुरु वशिष्ठ एवं अपनी प्रजा से राय लेते हैं तो राजा के इस निर्णय पर सभी इसे उचित कार्य बताते हैं। सबके एक राय होने पर राजा दशरथ घोषणा करवा देते हैं कि राम का राज्याभिषेक होगा। इस पर सारी प्रजा झूम उठती है, सब लोग नाच गा रहे थे कि इतने में मंथरा आती है और पूछती है कि यह सब क्या हो रहा। इसके बाद वह कैकेई के कान भर देती है। कैकेई राजा दशरथ से अपना दो वरदान मांग लेती हैं, जिसमें पहला भरत जी को राज्य और दूसरा राम को 14 वर्ष का वनवास। पिता की आज्ञा जानकर राम वन चले जाते हैं। उनके साथ सीता और लक्ष्मण भी जाने को तैयार हो जाते हैं। इस खबर को सुनकर सारे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। श्रीराम के पुत्र धर्म का निर्वाह देखकर दर्शक जयकारे लगाने लगे। इस मौके पर अध्यक्ष श्याम धर पाठक, प्रबंधक सुनील कुमार पाठक, बलजोर पाल, प्रभाकर पाठक, संतोष कुमार दुबे, रमेश दुबे, सुरेंद्र मौर्या, शशि पांडेय, सुशील, शमशेर यादव, अजीत, अभय, अभिषेक आदि लोग मौजूद थे।
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