फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   भारत की हिंदी हुई भारत में वीरान...

भारत की हिंदी हुई भारत में वीरान...

Fri, 15 Sep 2017 12:43 AM IST
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
भारत की हिंदी हुई भारत में वीरान...
ज्ञानपुर (भदोही)।
विज्ञापन

अंग्रेजी छाती चढ़ी, पीछे खींचे टांग/ हिंदी के उत्थान का अजब सलोना स्वांग।
साहब अंग्रेजी पढ़े, हिंदी पढ़े किसान/ बुधुआ मुंह बाए फिरे, डबलू की है शान।।
सचमुच! इसमें कोई संदेह नहीं कि समय के साथ हिंदी का वैभव बढ़ा है, लेकिन हिंदुस्तान में हिंदी को जो मुकाम मिलना चाहिए, उससे वह कई पायदान पर वंचित रह गई है। स्वार्थ की राजनीति में हिंदी को अपनी समृद्धि का सबूत देने के लिए विवश कर दिया गया है। शब्द वैभव से सजी हिंदी भाषा की मौजूदा स्थिति पर भदोही जिले के साहित्यकारों की प्रतिक्रिया काबिलेगौर है।
साहित्यकार और कवि कृष्णावतार त्रिपाठी ‘राही’ उपरोक्त लाइनों को दोहराते हुए कहते हैं कि हमारा देश पहला ऐसा देश है, जो अपनी ही मातृभाषा का दिवस मनाकर अपमान करता है। आज ही के दिन 1949 में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल की गई हिंदी भाषा को वोट की राजनीति के दुष्चक्र में इस कदर धकेला गया कि आज तक उसे उसका वास्तविक स्थान नहीं मिल सका। वह हिंदी पर अपनी लाइन- सात समंदर पार भी अंग्रेजी का मान, भारत की हिंदी हुई भारत में वीरान... सुनाते हुए कहते हैं कि जब तक भाषा के नाम पर षड्यंत्र कर सत्ता हथियाने का खेल चलता रहेगा, तब तक हिंदी का समुचित उत्थान नहीं हो पाएगा। एक दिन के लिए अपनी भाषा का दिवस मनाने का क्या मतलब। यह वर्ष भर याद रहनी चाहिए। इस भाषा का हृदय इतना विशाल है कि इसने अन्य तमाम भाषाओं को आत्मसात कर लिया है।
विज्ञापन

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक और साहित्यकार डॉ. राजकुमार पाठक कहते हैं कि पहले की अपेक्षा हिंदी बहुत आगे बढ़ी है। अपनी समृद्धि के चलते हिंदी भाषा ने अंतर्राष्ट्रीय जगत में भी सम्मानजनक स्थान बना लिया है। इस भाषा ने अन्य भाषाओं के शब्दों को आत्मसात कर संकीर्णता के दायरे को पीछे छोड़ दिया है। इससे इसका निरंतर विकास होता जा रहा है। हमारे देश के पहली पंक्ति के कई नेताओं ने विदेशों में हिंदी में संबोधन कर हिंदी का मान बढ़ाया है। यह देश की विविधता को एक सूत्र में बांधने की क्षमता रखती है। लेकिन, इसे राजनीति में नहीं फंसाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed