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लापरवाही: लोकतंत्र के यज्ञ में नहीं डाली आहूति
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ज्ञानपुर। बीएलओ की लापरवाही का खामियाजा रविवार को मतदाताओं को उठाना पड़ा। पर्ची और मतदाता सूची में अंतर होने से बड़ी संख्या में मतदाता लोकतंत्र के यज्ञ में मतदान रूपी आहुति डालने से वंचित रह गए। लापरवाही के चलते निर्वाचन आयोग के अधिक से अधिक मतदान अभियान को बट्टा लगा। इसी तरह कुछ बूथों पर सुबह 10 बजे तक बीएलओ नदारद रहे। इससे लोग परची के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। यही नहीं दिव्यांग मतदाताओं को सुविधाएं मिलने का दावा भी हवा हो गया।
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अधिक से अधिक मतदान कराने के लिए करीब दो महीने से मतदाता जागरूकता अभियान चलाने से लेकर कई आयोजन कराए गए। प्रशासन से लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से भी लोगों को जागरूक किया गया। तमाम प्रयास रविवार को मतदान दिवस के दिन धरे के धरे रह गए। बीएलओ की उदासीनता से बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। पूर्व माध्यमिक विद्यालय भदोही नगर में मेहरुन्निशा का नाम बीएलओ की परची में बदल गया था, जिससे वह वोट नहीं डाल सकीं। सुरियावां के छपरिया, नेतानगर के बूथों पर सौ से अधिक मतदाताओं का नाम सूची से गायब था। कुछ लोगों का नाम था, लेकिन वह भी गलत। इससे वे मतदान से वंचित रह गए। डीघ के दरवांसी बूथ पर मतदान के लिए पहुंचे एक वनवासी परिवार का नाम मतदाता सूची में नहीं था। इससे पूरा कुनबा बिना वोट डाले ही लौट गया। करीब-करीब हर बूथ पर दो से चार लोगों का नाम कटने और गलत होने से लोगों को बिना वोट डाले ही लौटना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ दिव्यांग मतदाताओं को सुविधा देने की बात भी हवा हो गई। बूथों पर न तो उन्हें पहुंचाने के लिए कोई वाहन दिखा और न ही अन्य सुविधाएं रहीं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अधिक से अधिक मतदान कराने के लिए करीब दो महीने से मतदाता जागरूकता अभियान चलाने से लेकर कई आयोजन कराए गए। प्रशासन से लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से भी लोगों को जागरूक किया गया। तमाम प्रयास रविवार को मतदान दिवस के दिन धरे के धरे रह गए। बीएलओ की उदासीनता से बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। पूर्व माध्यमिक विद्यालय भदोही नगर में मेहरुन्निशा का नाम बीएलओ की परची में बदल गया था, जिससे वह वोट नहीं डाल सकीं। सुरियावां के छपरिया, नेतानगर के बूथों पर सौ से अधिक मतदाताओं का नाम सूची से गायब था। कुछ लोगों का नाम था, लेकिन वह भी गलत। इससे वे मतदान से वंचित रह गए। डीघ के दरवांसी बूथ पर मतदान के लिए पहुंचे एक वनवासी परिवार का नाम मतदाता सूची में नहीं था। इससे पूरा कुनबा बिना वोट डाले ही लौट गया। करीब-करीब हर बूथ पर दो से चार लोगों का नाम कटने और गलत होने से लोगों को बिना वोट डाले ही लौटना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ दिव्यांग मतदाताओं को सुविधा देने की बात भी हवा हो गई। बूथों पर न तो उन्हें पहुंचाने के लिए कोई वाहन दिखा और न ही अन्य सुविधाएं रहीं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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