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यादों के झरोखे से- चुनाव

Wed, 13 Mar 2019 11:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2019 11:35 PM IST
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यादों के झरोखे से- चुनाव

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चौरी। 60-70 के दशक के चुनावों को देख चुके लठिया गांव निवासी देवी शरण तिवारी आज के चुनावी माहौल को लेकर काफी आहत हैं। कहते हैं कि पहले के चुनाव देखते ही देखते संपन्न हो जाते थे और पाक-साफ नेता चुन लिए जाते थे। उन दिनों प्रत्याशी चंदा मांगकर चुनाव लड़ते थे, अब प्रत्याशी पैसे देकर वोट खरीदने लगे हैं। धनबल, बाहुबल का बोलबाला होने से चुनाव की दशा और दिशा दोनों बदल चुकी है।

19वीं लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीतिक दलों की ओर से अपने प्रत्याशी उतारकर प्रचार-प्रसार भी शुरू हो गया है। जीत-हार को लेकर जातीय गुणागणित भी शुरू हो चुकी है। चार से पांच दशक पूर्व के चुनावों को करीब से देख चुके लठिया निवासी 75 वर्षीय देवी शरण तिवारी ने बुधवार को अमर उजाला से बातचीत में कहा कि तब और अब के चुनावों में बहुत फर्क हो गया है। उन दिनों गिनती के राजनीतिक दल ही हुआ करते थे और प्रत्याशी भी जमीन से जुड़े नेताओं को बनाया जाता था। अब धनबल और बाहुबल को प्राथमिकता दी जाती है। उस समय जरूरत पड़ने पर प्रत्याशी लोगों से चंदा मांगता था और अब मतदाताओं को लोभ दिया जाता है। देवी शरण ने आयोग की ओर से उठाए कदमों की भी सराहना की। कहा कि ईवीएम आने से चुनाव में पारदर्शिता आई है अन्यथा दबंग और मनबढ़ किस्म के प्रत्याशी चुनाव की तस्वीर ही बदल देते थे।
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