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उपेक्षाओं का दंश झेल रहा माधोसिंह रेलवे स्टेशन
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औराई। कभी पूर्वोत्तर रेलवे की पहचान वाला माधोसिंह रेलवे स्टेशन अब उपेक्षा का दंश झेलने को विवश है। लंबी दूरी की गाडिय़ों का ठहराव, यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का अभाव स्टेशन की पहचान बन चली है।
करीब तीन दशक पहले यह स्टेशन वाराणसी-इलाहाबाद सिटी को छोटी लाइन से जोड़ती थी। दूरदराज क्षेत्रों समेत जनपद मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी धाम आने-जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए चील्ह रेलखंड पर सुबह-शाम ट्रेनें भी चलाई जाती थीं और चील्ह स्टेशन पर भी चहल-पहल दिखती थी। लेकिन खंड को बड़ी लाइन में परिवर्तित करते हुए चील्ह खंड को बंद कर दिया गया। काफी लंबे-चौड़े यार्ड, सुविधाओं से लैस स्टेशन भापयुक्त इंजनों को कोयले ही पूर्ति के साथ ही पानी भरने की सुविधाएं दी जाती थीं। पर्याप्त मात्रा में जगह उपलब्ध होने के कारण निरीक्षण आदि को पहुंचने अधिकारियों के विश्राम कक्ष, कर्मचारियों के लिए बने आवासों में बिजली की चकाचौंध से परिसर जगमग रहता था। धीरे-धीरे सभी व्यवस्थाओं को खत्म कर मात्र पैसेंजर ट्रेनों का संचालन तक ही प्रशासन सीमित हो गया। एक-दो साप्ताहिक दूरगामी ट्रेनों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-मेल का ठहराव न देने से स्टेशन गरिमा को बचाने में सफल नहीं हो पा रहा है। वर्तमान समय में स्टेशन मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बड़ी लाइन होने के बाद यात्रियों एवं क्षेत्रवासियों में इस बात की आस जगी थी कि ट्रेनों का बड़े पैमाने पर स्टापेज होगा तो क्षेत्र का विकास भी होगा, किंतु यह संभव नहीं हो पाया।
खल रही जनप्रतिनिधियों की सुस्ती
औराई। दो दशक पहले माधोसिंह स्टेशन की जो रौनक लोगों की जुबानी रही है वह अब समाप्त हो गई। स्टेशन के दोनों छोर पर रेलवे पुलिस के चौकी और थाने यात्रियों में सुरक्षा का अहसास कराते रहे हैं। मिर्जापुर के पीतल उद्योग और चीनी मिट्टी उत्पाद से भरे रहने वाले परिसर कंटेनर डिपो निर्माण के आगे बेबस होकर रह गए। डिपो भी बंद हो गया सामानों की ढुलाई चील्ह रेलखंड का इतिहास बन गया। कहा जा रहा है कि यदि सांसद स्तर से प्रयास किया गया होता तो मिर्जापुर क्षेत्र को जोड़ने वाली लाइन बंद न होती और वाराणसी-इलाहाबाद सिटी खंड के उक्त स्टेशन पर महत्वपूर्ण ट्रेनों की सौगात भी मिलती।
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टिकट बिक्री पर निर्भर होता है स्टापेज
ज्ञानपुर। वाराणसी मंडल में तैनात पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों का ठहराव टिकट की बिक्री पर निर्भर करता है। आने वाले समय में ट्रायल कराकर कुछ और ट्रेनों का ठहराव संभव हो सकता है। चील्ह लाइन के चालू होने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह गोरखपुर मुख्यालय पर निर्भर है।
करीब तीन दशक पहले यह स्टेशन वाराणसी-इलाहाबाद सिटी को छोटी लाइन से जोड़ती थी। दूरदराज क्षेत्रों समेत जनपद मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी धाम आने-जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए चील्ह रेलखंड पर सुबह-शाम ट्रेनें भी चलाई जाती थीं और चील्ह स्टेशन पर भी चहल-पहल दिखती थी। लेकिन खंड को बड़ी लाइन में परिवर्तित करते हुए चील्ह खंड को बंद कर दिया गया। काफी लंबे-चौड़े यार्ड, सुविधाओं से लैस स्टेशन भापयुक्त इंजनों को कोयले ही पूर्ति के साथ ही पानी भरने की सुविधाएं दी जाती थीं। पर्याप्त मात्रा में जगह उपलब्ध होने के कारण निरीक्षण आदि को पहुंचने अधिकारियों के विश्राम कक्ष, कर्मचारियों के लिए बने आवासों में बिजली की चकाचौंध से परिसर जगमग रहता था। धीरे-धीरे सभी व्यवस्थाओं को खत्म कर मात्र पैसेंजर ट्रेनों का संचालन तक ही प्रशासन सीमित हो गया। एक-दो साप्ताहिक दूरगामी ट्रेनों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-मेल का ठहराव न देने से स्टेशन गरिमा को बचाने में सफल नहीं हो पा रहा है। वर्तमान समय में स्टेशन मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बड़ी लाइन होने के बाद यात्रियों एवं क्षेत्रवासियों में इस बात की आस जगी थी कि ट्रेनों का बड़े पैमाने पर स्टापेज होगा तो क्षेत्र का विकास भी होगा, किंतु यह संभव नहीं हो पाया।
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खल रही जनप्रतिनिधियों की सुस्ती
औराई। दो दशक पहले माधोसिंह स्टेशन की जो रौनक लोगों की जुबानी रही है वह अब समाप्त हो गई। स्टेशन के दोनों छोर पर रेलवे पुलिस के चौकी और थाने यात्रियों में सुरक्षा का अहसास कराते रहे हैं। मिर्जापुर के पीतल उद्योग और चीनी मिट्टी उत्पाद से भरे रहने वाले परिसर कंटेनर डिपो निर्माण के आगे बेबस होकर रह गए। डिपो भी बंद हो गया सामानों की ढुलाई चील्ह रेलखंड का इतिहास बन गया। कहा जा रहा है कि यदि सांसद स्तर से प्रयास किया गया होता तो मिर्जापुर क्षेत्र को जोड़ने वाली लाइन बंद न होती और वाराणसी-इलाहाबाद सिटी खंड के उक्त स्टेशन पर महत्वपूर्ण ट्रेनों की सौगात भी मिलती।
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टिकट बिक्री पर निर्भर होता है स्टापेज
ज्ञानपुर। वाराणसी मंडल में तैनात पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों का ठहराव टिकट की बिक्री पर निर्भर करता है। आने वाले समय में ट्रायल कराकर कुछ और ट्रेनों का ठहराव संभव हो सकता है। चील्ह लाइन के चालू होने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह गोरखपुर मुख्यालय पर निर्भर है।