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युवाओं को रोजगार दिलाने में फिसड्डी कौशल मिशन
Updated Tue, 10 Oct 2017 12:47 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
युवाओं को रोजगार दिलाने एवं स्वरोजगार लायक बनाने के लिए जिले में चल रहे कौशल विकास मिशन रोजगार दिलाने में फिसड्डी साबित हो गए हैं। तीन साल में मात्र 15 से 20 फीसदी युवाओं के हाथों में नौकरी आ सकी। साढ़े चार हजार युवा विभिन्न ट्रेड की दक्षता प्राप्त की, लेकिन उनमें 832 के हाथों में नौकरी आई या स्वरोजगार शुरू कर सके।
सूबे में बढ़ती बेरोजगारी कम करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कौशल विकास मिशन योजना चलाई जा रही है। इसमें युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष करने के लिए अलग-अलग सेक्टर के करीब 22 पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 से शुरू हुई इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए जिले में पांच केंद्र संचालित किए गए। शासन को काम दिखाने के लिए हर साल लक्ष्य से अधिक युवाओं का पंजीकरण कर प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन रोजगार दिलाने में विभाग पीछे ही रह गया। 2014-15 में 1264 के सापेक्ष 1740 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया लेकिन 268 को रोजगार एवं स्वरोजगार दिलाया जा सका। 2015-16 में 925 के सापेक्ष 1291 को प्रशिक्षण मिला। 2016-17 में 1170 के सापेक्ष 1566 को प्रशिक्षण मिला। तीन साल में 3368 के सापेक्ष 4597 को प्रशिक्षण दिलाया गया और 832 को रोजगार एवं स्वरोजगार मिला। कौशल मिशन के जिला प्रबंधक अचल सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार दिलाने का प्रयास किया जाता है। मुद्रा बैंक के जरिए स्वरोजगार और कंपनियों में भेजने का प्रयास किया जाता है।
कागजों में सिमटा सरकार का सपना
ज्ञानपुर।
प्रधानंमत्री कौशल विकास मिशन योजना के तहत युवाओं को रोजगार दिलाने का सपना संस्थाओं की मनमानी से सपना ही रह जाएगा। जिले में संचालित केंद्र सिर्फ कागजों पर ही चल रहे हैं। गत दिनों एक अधिकारी के निरीक्षण में केंद्र पर न तो रजिस्टर दिखा और न ही अन्य व्यवस्थाएं। ऐसे में युवाओं को रोजगार दिला पाना बेमानी होगा।
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युवाओं को रोजगार दिलाने एवं स्वरोजगार लायक बनाने के लिए जिले में चल रहे कौशल विकास मिशन रोजगार दिलाने में फिसड्डी साबित हो गए हैं। तीन साल में मात्र 15 से 20 फीसदी युवाओं के हाथों में नौकरी आ सकी। साढ़े चार हजार युवा विभिन्न ट्रेड की दक्षता प्राप्त की, लेकिन उनमें 832 के हाथों में नौकरी आई या स्वरोजगार शुरू कर सके।
सूबे में बढ़ती बेरोजगारी कम करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कौशल विकास मिशन योजना चलाई जा रही है। इसमें युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष करने के लिए अलग-अलग सेक्टर के करीब 22 पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 से शुरू हुई इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए जिले में पांच केंद्र संचालित किए गए। शासन को काम दिखाने के लिए हर साल लक्ष्य से अधिक युवाओं का पंजीकरण कर प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन रोजगार दिलाने में विभाग पीछे ही रह गया। 2014-15 में 1264 के सापेक्ष 1740 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया लेकिन 268 को रोजगार एवं स्वरोजगार दिलाया जा सका। 2015-16 में 925 के सापेक्ष 1291 को प्रशिक्षण मिला। 2016-17 में 1170 के सापेक्ष 1566 को प्रशिक्षण मिला। तीन साल में 3368 के सापेक्ष 4597 को प्रशिक्षण दिलाया गया और 832 को रोजगार एवं स्वरोजगार मिला। कौशल मिशन के जिला प्रबंधक अचल सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार दिलाने का प्रयास किया जाता है। मुद्रा बैंक के जरिए स्वरोजगार और कंपनियों में भेजने का प्रयास किया जाता है।
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कागजों में सिमटा सरकार का सपना
ज्ञानपुर।
प्रधानंमत्री कौशल विकास मिशन योजना के तहत युवाओं को रोजगार दिलाने का सपना संस्थाओं की मनमानी से सपना ही रह जाएगा। जिले में संचालित केंद्र सिर्फ कागजों पर ही चल रहे हैं। गत दिनों एक अधिकारी के निरीक्षण में केंद्र पर न तो रजिस्टर दिखा और न ही अन्य व्यवस्थाएं। ऐसे में युवाओं को रोजगार दिला पाना बेमानी होगा।
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