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मासूमों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़
Updated Fri, 11 Aug 2017 01:15 AM IST
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मासूमों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़
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ज्ञानपुर (भदोही)। जिले के अनगिनत कांवेंट स्कूलों और निजी विद्यालयों से संबद्ध डग्गामार वाहनों में बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों को ठूंसकर वाहनों में फर्राटा भरते वाहन हमेशा जोखिम का सबब बने रहते हैं। पिछले साल कैयरमऊ रेलवे क्रॉसिंग पर भीषण हादसे के बाद भी अभिभावक स्कूल संचालक, वाहन मालिकों के साथ प्रशासन भी नहीं चेत सका है। ऐसे में भविष्य में कभी भी कैयरमऊ जैसी घटना की पुनरावृत्ति होने से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति करके रह जाता है।
भदोही जिले में जीटी रोड से लेकर कई मुख्य मार्गों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर निजी स्कूलों में संबद्ध वाहन बड़ी संख्या में मासूमों को ठूंसकर चलते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। प्रशासन की ओर से स्कूल वाहनों की जांच भी गंभीरता से नहीं की जाती। बिना परमिट फिटनेस के दौड़ रहे इन वाहनों के स्वामियों की ओर से लापरवाही बरती जाती है। जब हादसे होते हैं तो खूब हो हल्ला मचता है, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही मामला फिर जस का तस हो जाता है। खास बात कि प्राइवेट स्कूलों के वहीं वाहनों के अभिलेख और फिटनेस सही रहते हैं, जो कि संचालकों का निजी तौर पर होता है। जबकि विद्यालय में अटैच डग्गामार वाहन तो मानक पर कहीं से खरे नहीं उतरते। दस बच्चों की क्षमता वाले वाहनों में 15 से अधिक बच्चों को भरकर आवागमन करते हैं। जिले में निजी विद्यालयों की तादाद तीन सौ से अधिक हैं। जबकि परिवहन विभाग में वाहनों का पंजीयन सवा सौ के आसपास है। इनमें करीब 75 बसें हैं। ऐसे में अधिसंख्य डग्गामार वाहन बिना पंजीयन के ही मासूमों को ढोकर उनकी जिंदगी को खतरे में डालते हैं।
जिले में स्कूली वाहनों का जांच अभियान चलता रहता है। पिछले महीने करीब 25 स्कूली वाहनों का चालान किया गया था। इसमें बिना परमिट के आठ वाहन थे। दो वाहन बिना पंजीयन के थे। अटैच वाहनों में मानक पूरा नहीं रहता है। - पीएस राय, उपसंभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन
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भदोही जिले में जीटी रोड से लेकर कई मुख्य मार्गों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर निजी स्कूलों में संबद्ध वाहन बड़ी संख्या में मासूमों को ठूंसकर चलते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। प्रशासन की ओर से स्कूल वाहनों की जांच भी गंभीरता से नहीं की जाती। बिना परमिट फिटनेस के दौड़ रहे इन वाहनों के स्वामियों की ओर से लापरवाही बरती जाती है। जब हादसे होते हैं तो खूब हो हल्ला मचता है, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही मामला फिर जस का तस हो जाता है। खास बात कि प्राइवेट स्कूलों के वहीं वाहनों के अभिलेख और फिटनेस सही रहते हैं, जो कि संचालकों का निजी तौर पर होता है। जबकि विद्यालय में अटैच डग्गामार वाहन तो मानक पर कहीं से खरे नहीं उतरते। दस बच्चों की क्षमता वाले वाहनों में 15 से अधिक बच्चों को भरकर आवागमन करते हैं। जिले में निजी विद्यालयों की तादाद तीन सौ से अधिक हैं। जबकि परिवहन विभाग में वाहनों का पंजीयन सवा सौ के आसपास है। इनमें करीब 75 बसें हैं। ऐसे में अधिसंख्य डग्गामार वाहन बिना पंजीयन के ही मासूमों को ढोकर उनकी जिंदगी को खतरे में डालते हैं।
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जिले में स्कूली वाहनों का जांच अभियान चलता रहता है। पिछले महीने करीब 25 स्कूली वाहनों का चालान किया गया था। इसमें बिना परमिट के आठ वाहन थे। दो वाहन बिना पंजीयन के थे। अटैच वाहनों में मानक पूरा नहीं रहता है। - पीएस राय, उपसंभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन
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