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भरत चरित्र की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
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वहिदानगर। डीघ ब्लॉक के कोनिया स्थित रामलीला मैदान में चल रहे नौ दिवसीय श्री सीताराम महायज्ञ के चौथे दिन शुक्रवार को कथावाचक हरिकृष्ण महाराज ने भक्तों को भरत चरित्र की कथा सुनाकर भावविभोर कर दिया।
कहा कि भरत का राम के प्रति अटूट प्रेम मानव जीवन में भातृत्व प्रेम अनूठी मिसाल का परिचायक है। जिन्होंने 14 साल तक राम वनवास के दौरान उनकी चरण पादुका रखकर राम राज्य चलाया। ऐसा कोई दूसरा भाई न हुआ है और न होगा जो भरत के भातृत्व प्रेम की मिसाल को पीछे छोड़ सके। माता कैकई ने अपने पुत्र भरत के राजतिलक राम को वनवास करा दिया परंतु जैसे ही भरत को राम के वनवास की जानकारी हुई। उन्होंने अपनी मां का परित्याग कर राजतिलक कराने से भी मना कर दिया। कहा कि वर्तमान समय में लोगों को भगवान श्रीराम और भरत के प्रेम से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। इस अनूठी भातृ प्रेम के मिसाल की गाथा लोग भूलते जा रहे हैं। कहा कि रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और लोभ लालच न कर प्रेम की भावना बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है। मौके पर दिनेश पांडेय, रिखीराम पांडेय, परोरन पांडेय, धर्मेंद्र पांडेय, राजू शुक्ल आदि द्गद्मस्ह्ल2ठ्ठ रहे।
कहा कि भरत का राम के प्रति अटूट प्रेम मानव जीवन में भातृत्व प्रेम अनूठी मिसाल का परिचायक है। जिन्होंने 14 साल तक राम वनवास के दौरान उनकी चरण पादुका रखकर राम राज्य चलाया। ऐसा कोई दूसरा भाई न हुआ है और न होगा जो भरत के भातृत्व प्रेम की मिसाल को पीछे छोड़ सके। माता कैकई ने अपने पुत्र भरत के राजतिलक राम को वनवास करा दिया परंतु जैसे ही भरत को राम के वनवास की जानकारी हुई। उन्होंने अपनी मां का परित्याग कर राजतिलक कराने से भी मना कर दिया। कहा कि वर्तमान समय में लोगों को भगवान श्रीराम और भरत के प्रेम से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। इस अनूठी भातृ प्रेम के मिसाल की गाथा लोग भूलते जा रहे हैं। कहा कि रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और लोभ लालच न कर प्रेम की भावना बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है। मौके पर दिनेश पांडेय, रिखीराम पांडेय, परोरन पांडेय, धर्मेंद्र पांडेय, राजू शुक्ल आदि द्गद्मस्ह्ल2ठ्ठ रहे।
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