{"_id":"5b11937f4f1c1ba56e8b5bae","slug":"11527878527-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"137 करोड़ खर्च, नहीं बदली गावों की तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
137 करोड़ खर्च, नहीं बदली गावों की तस्वीर
Updated Sat, 02 Jun 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
जिले की 561 ग्राम पंचायतों के विकास पर तीन साल में करीब 137 करोड़ खर्च होने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदल सकी। राज्य वित्त एवं 14वें वित्त में मिली रकम नाली, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर जैसे कार्य पर खर्च हुए, लेकिन खर्च धन की तुलना में लोगों को उतना लाभ समझ में नहीं आ रहा है।
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद कई विभागों संग क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के मदों में कटौती करते हुए उसे राज्य वित्त एवं 14वें वित्त के माध्यम से गांवों के विकास के लिए भेजा गया। गांव के बेहतर विकास के लिए सरकार ने पैसे भी खूब भेजे। वर्ष 2015 से 2018 तक जिले की 561 ग्राम पंचायतों के विकास पर करीब 137 करोड़ खर्च किया गया। जिसमें नाली, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर समेत अन्य कार्य कराया जाना था। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी गांवों का विकास उस गति से नहीं हो सका, जिसकी उम्मीद थी। आज भी कई गांवों की बस्तियों में जाने के लिए लोगों को पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। सबसे अधिक खराब स्थिति सीमावर्ती गांवों की है। सुरियावां के अबरना, कुसौड़ा, चौरी के मनापुर जैसे गांवों में कच्चे मार्ग से ही लोगों का आना जाना होता है।
इनसेट
मॉडल स्कूलों पर दिखा विकास
ज्ञानपुर। राज्य वित्त एवं 14वें वित्त की रकम खर्च होने के बाद भी गांवों की तस्वीर भले ही नहीं बदली लेकिन जिले में चयनित 30 परिषदीय स्कूल की तस्वीर जरूर बदल गई। मॉडल बन रहे इन स्कूलों में बदलाव दिखाई पड़ा। 30 गांवों के मॉडल स्कूल को छोड़ दिया जाए तो अन्य गांवों का हाल ढाक के तीन पात वाला ही है।
विज्ञापन
इनसेट
जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि राज्य वित्त एवं 14वें वित्त से गांवों के विकास पर खर्च किया जा रहा है। तीन वित्तीय वर्ष में करीब 137 करोड़ खर्च हुए हैं। एक या दो साल के बाद गांवों की तस्वीर काफी बदली हुई दिखेगी।
विज्ञापन
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद कई विभागों संग क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के मदों में कटौती करते हुए उसे राज्य वित्त एवं 14वें वित्त के माध्यम से गांवों के विकास के लिए भेजा गया। गांव के बेहतर विकास के लिए सरकार ने पैसे भी खूब भेजे। वर्ष 2015 से 2018 तक जिले की 561 ग्राम पंचायतों के विकास पर करीब 137 करोड़ खर्च किया गया। जिसमें नाली, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर समेत अन्य कार्य कराया जाना था। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी गांवों का विकास उस गति से नहीं हो सका, जिसकी उम्मीद थी। आज भी कई गांवों की बस्तियों में जाने के लिए लोगों को पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। सबसे अधिक खराब स्थिति सीमावर्ती गांवों की है। सुरियावां के अबरना, कुसौड़ा, चौरी के मनापुर जैसे गांवों में कच्चे मार्ग से ही लोगों का आना जाना होता है।
विज्ञापन
इनसेट
मॉडल स्कूलों पर दिखा विकास
ज्ञानपुर। राज्य वित्त एवं 14वें वित्त की रकम खर्च होने के बाद भी गांवों की तस्वीर भले ही नहीं बदली लेकिन जिले में चयनित 30 परिषदीय स्कूल की तस्वीर जरूर बदल गई। मॉडल बन रहे इन स्कूलों में बदलाव दिखाई पड़ा। 30 गांवों के मॉडल स्कूल को छोड़ दिया जाए तो अन्य गांवों का हाल ढाक के तीन पात वाला ही है।
विज्ञापन
इनसेट
जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि राज्य वित्त एवं 14वें वित्त से गांवों के विकास पर खर्च किया जा रहा है। तीन वित्तीय वर्ष में करीब 137 करोड़ खर्च हुए हैं। एक या दो साल के बाद गांवों की तस्वीर काफी बदली हुई दिखेगी।