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आधा सत्र गुजरने की ओर, स्कूलों को किताबों का इंतजार
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:47 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
शासन की उदासीनता कहें या कुछ और। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथों में अब तक सभी किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर नि:शुल्क पुस्तकों की खेप रुक-रुककर पहुंच रही है। शनिवार को बीआरसी ज्ञानपुर में करीब 40 हजार किताबें आईं, जिसे स्कूलों तक पहुंचाने में सितंबर माह लग जाएगा।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने से उसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पाता। कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में अप्रैल से ही नए शिक्षा सत्र का आगाज कर दिया गया, लेकिन पूर्व के कार्यों में अब तक बदलाव नहीं हो सका है। इसके चलते, गत तीन शिक्षा सत्र से छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इक्का-दुक्का किताबों के सहारे ही उनकी पढ़ाई चल रही है। सितंबर का पहला पखवारा शुरू है और अब भी बीआरसी पर किताबें आ रही हैं, जबकि मई से जून तक इन किताबों को आनी चाहिए। शनिवार को एक ट्रक में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक की विभिन्न पुस्तकें आईं। विभागीय अधिकारियों की मानी जाए तो 40 हजार पुस्तकें पहुंची हैं।
कोट
नि:शुल्क पुस्तकें शासन से ही लेट आ रही है। स्कूलों में पुरानी किताबों से समायोजन किया गया है। जैसे-जैसे नई पुस्तक आ रही है, उसका वितरण हो रहा है। - प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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शासन की उदासीनता कहें या कुछ और। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथों में अब तक सभी किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर नि:शुल्क पुस्तकों की खेप रुक-रुककर पहुंच रही है। शनिवार को बीआरसी ज्ञानपुर में करीब 40 हजार किताबें आईं, जिसे स्कूलों तक पहुंचाने में सितंबर माह लग जाएगा।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने से उसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पाता। कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में अप्रैल से ही नए शिक्षा सत्र का आगाज कर दिया गया, लेकिन पूर्व के कार्यों में अब तक बदलाव नहीं हो सका है। इसके चलते, गत तीन शिक्षा सत्र से छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इक्का-दुक्का किताबों के सहारे ही उनकी पढ़ाई चल रही है। सितंबर का पहला पखवारा शुरू है और अब भी बीआरसी पर किताबें आ रही हैं, जबकि मई से जून तक इन किताबों को आनी चाहिए। शनिवार को एक ट्रक में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक की विभिन्न पुस्तकें आईं। विभागीय अधिकारियों की मानी जाए तो 40 हजार पुस्तकें पहुंची हैं।
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कोट
नि:शुल्क पुस्तकें शासन से ही लेट आ रही है। स्कूलों में पुरानी किताबों से समायोजन किया गया है। जैसे-जैसे नई पुस्तक आ रही है, उसका वितरण हो रहा है। - प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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