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परगासपुर के प्रधान का सीज होगा वितीय अधिकार
Updated Tue, 01 Aug 2017 11:46 PM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)। भदोही विकास खंड के परगासपुर में पौने दो लाख के गबन मामले में ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और रोजगार सेवक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डीएम के निर्देश पर जिला पंचायत राज विभाग प्रधान का वित्तीय अधिकार सीज, सेक्रेटरी को निलंबन और रोजगार सेवक की सेवा समाप्त करने की कवायद में जुट गया है। अधिशासी अभियंता नहर की जांच में गत दिनों खुलासा हुआ था। गांव में जो कार्य हुए नहीं, उसे भी पूर्ण दिखाया गया।
करीब छह माह पूर्व परगासपुर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर गांव में कराए गए विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच के लिए अधिशासी अभियंता नहर केएन जायसवाल को नामित किया गया। 14 जुलाई को अधिशासी अभियंता ने गांव में कराए गए विकास कार्यों की जांच की। जांच में धईकार बस्ती से हरिजन बस्ती तक सड़क के दोनों तरफ मिट्टी का कार्य में एक लाख 82 हजार खर्च दिखाया गया जबकि 88 हजार बिना काम कराए खर्च होना पाया गया। इसी तरह, ग्रामसभा में वृक्षारोपण कार्यक्रम में तकनीकी सहायक ने कहा कि वरुणा नदी के अंदरूनी पटरी सुरक्षा खाई बनाई गई और पौधरोपण किया गया। इसमें 48 हजार खर्च दिखाया गया, जबकि जांच में सिर्फ छह हजार ही खर्च हुआ था। जांचोपरांत यह स्पष्ट हुआ कि एक लाख 78 हजार रुपये का अपव्यय किया गया। इसके लिए ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, रोजगार सेवक की संलिप्तता मिली। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिलाधिकारी विशाख जी ने ग्राम प्रधान का वित्तीय अधिकार सीज करने, सेक्रेटरी को निलंबित करने का निर्देश दिया, जबकि रोजगार सेवक पर कार्रवाई के लिए परियोजना निदेशक को कहा। जिलाधिकारी का निर्देश मिलते ही जिला पंचायत राज विभाग कार्रवाई में जुट गया है। डीपीआरओ अनिल त्रिपाठी ने कहा कि निलंबन और वित्तीय अधिकार सीज करने की नोटिस बनाई जा रही है। रोजगार सेवक की सेवा समाप्ति के लिए परियोजना निदेशक को पत्र लिखा गया है।
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करीब छह माह पूर्व परगासपुर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर गांव में कराए गए विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच के लिए अधिशासी अभियंता नहर केएन जायसवाल को नामित किया गया। 14 जुलाई को अधिशासी अभियंता ने गांव में कराए गए विकास कार्यों की जांच की। जांच में धईकार बस्ती से हरिजन बस्ती तक सड़क के दोनों तरफ मिट्टी का कार्य में एक लाख 82 हजार खर्च दिखाया गया जबकि 88 हजार बिना काम कराए खर्च होना पाया गया। इसी तरह, ग्रामसभा में वृक्षारोपण कार्यक्रम में तकनीकी सहायक ने कहा कि वरुणा नदी के अंदरूनी पटरी सुरक्षा खाई बनाई गई और पौधरोपण किया गया। इसमें 48 हजार खर्च दिखाया गया, जबकि जांच में सिर्फ छह हजार ही खर्च हुआ था। जांचोपरांत यह स्पष्ट हुआ कि एक लाख 78 हजार रुपये का अपव्यय किया गया। इसके लिए ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, रोजगार सेवक की संलिप्तता मिली। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिलाधिकारी विशाख जी ने ग्राम प्रधान का वित्तीय अधिकार सीज करने, सेक्रेटरी को निलंबित करने का निर्देश दिया, जबकि रोजगार सेवक पर कार्रवाई के लिए परियोजना निदेशक को कहा। जिलाधिकारी का निर्देश मिलते ही जिला पंचायत राज विभाग कार्रवाई में जुट गया है। डीपीआरओ अनिल त्रिपाठी ने कहा कि निलंबन और वित्तीय अधिकार सीज करने की नोटिस बनाई जा रही है। रोजगार सेवक की सेवा समाप्ति के लिए परियोजना निदेशक को पत्र लिखा गया है।
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