गेहूं के बुआई सीजन में डीएपी के संकट से जूझ रहे किसानों को फिलहाल थोड़ी राहत मिली है। शासन स्तर से जिले के लिए भेजी गई रैक मिल गई है। जिसमें 700 एमटी डीएपी समितियों और 450 एमटी प्राइवेट दुकानों के लिए मिली है। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार की देखरेख में रैक जिले में भेजी गई।
रबी सीजन में गेहूं संग दलहन-तिलहन (चना, मटर, सरसों) की खेती के लिए बोआई शुरू हो चुकी है। 49 हजार हेक्टेयर में करीब 50 फीसदी तक बुआई हो चुकी है। समितियों पर डीएपी की कमी के कारण किसानों को पखवाड़े भर से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। जिसको लेकर किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। शुक्रवार को शासन स्तर से भेजी गई रैक जिले को मिल गई। जिससे कुछ हद तक किसानों को राहत मिलेगी। साधन सहकारी समितियों से कुल 2700 मीट्रिक टन डीएपी वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसकी तुलना में 1141 मीट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध हो सकी थी। आंकड़ों पर गौर करें तो किसानों को कम से कम छह से सात हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है, लेकिन रैक न आने से किसान परेशान हो गए। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि शुक्रवार को 1150 एमटी डीएपी की रैक जिले में आई। जिसमें 700 एमटी समितियों पर भेजी गई और 450 एमटी निजी दुकानों पर भेजी गई। उन्होंने बताया कि दो रैक डीएपी की मांग और की गई है। दोनों रैक मिलने पर खाद का संकट दूर होने की उम्मीद है।