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श्रम विभाग के फरमान से नींद उड़ी
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:47 AM IST
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भदोही। जिला ईंट निर्माता संघ की बुधवार को हुई बैठक में श्रम विभाग के ताजा फरमान पर चिंता व्यक्त करते हुए शासनादेश वापस लेने की मांग की गई। शासनादेश है कि कोई व्यवसायी अब अपने मजदूर को तीन माह में केवल पांच हजार तक नगद भुगतान कर सकता है। इसको लेकर ईंट भट्ठा व्यवसायियों का कहना है कि इससे तो मजदूरों के सामने भारी समस्या खड़ी हो जाएगी।
संघ के जिलाध्यक्ष मिठाई लाल दूबे ने कहा कि श्रम विभाग ने पत्रावली जारी की है, जिसमें कहा गया है कि मजदूरों को तीन माह में केवल पांच हजार तक नगद दिया जा सकेगा। कहा कि इस पर संगठन को आपत्ति है। क्योंकि नगद दी जाने वाली धनराशि सरकार से निर्धारित धनराशि से काफी कम है। क्योंकि ईंट भट्ठा व्यवसायी को मजदूरों को प्रति सप्ताह दो हजार देने का प्रचलन है। तीन माह में केवल पांच हजार नगद भुगतान की बाध्यता से मजदूर को दिक्कत होगी। कहा कि अधिसंख्य मजदूर गैर प्रांत अथवा गैर जिले से आते हैं। जिनका बैंकों में खाता तक नहीं है। और बैंकिग प्रक्रिया से वे अनभिज्ञ हैं। यह फरमान मजदूर हित में नहीं होगा। बैठक में जिग-जैग चिमनी लगाने की बाध्यता और सरकारी निर्माण में लाल ईंट पर प्रतिबंध लगाने की भी चर्चा हुई। इसके लिए सरकार से समय मांगने पर आम राय बनी। कहा गया कि लाखों लोगों को रोजगार देने वाला ईंट उद्योग सरकारी नीतियों के चलते समाप्त होने के कगार पर है। तय किया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मिलकर विरोध दर्ज कराएगा। चतुर्भुज गुप्ता, बब्बू खां, गया सिंह, तहसीलदार सिंह, जिलाजीत दूब, मन्ना यादव, ह्रदय सिंह, अशोक मिश्र, मेवालाल यादव, राहुल दूबे, प्रेमराज सिंह, जमील अहमद, जुबेर अहमद, मुन्नू मौर्य आदि उपस्थित रहे।
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संघ के जिलाध्यक्ष मिठाई लाल दूबे ने कहा कि श्रम विभाग ने पत्रावली जारी की है, जिसमें कहा गया है कि मजदूरों को तीन माह में केवल पांच हजार तक नगद दिया जा सकेगा। कहा कि इस पर संगठन को आपत्ति है। क्योंकि नगद दी जाने वाली धनराशि सरकार से निर्धारित धनराशि से काफी कम है। क्योंकि ईंट भट्ठा व्यवसायी को मजदूरों को प्रति सप्ताह दो हजार देने का प्रचलन है। तीन माह में केवल पांच हजार नगद भुगतान की बाध्यता से मजदूर को दिक्कत होगी। कहा कि अधिसंख्य मजदूर गैर प्रांत अथवा गैर जिले से आते हैं। जिनका बैंकों में खाता तक नहीं है। और बैंकिग प्रक्रिया से वे अनभिज्ञ हैं। यह फरमान मजदूर हित में नहीं होगा। बैठक में जिग-जैग चिमनी लगाने की बाध्यता और सरकारी निर्माण में लाल ईंट पर प्रतिबंध लगाने की भी चर्चा हुई। इसके लिए सरकार से समय मांगने पर आम राय बनी। कहा गया कि लाखों लोगों को रोजगार देने वाला ईंट उद्योग सरकारी नीतियों के चलते समाप्त होने के कगार पर है। तय किया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मिलकर विरोध दर्ज कराएगा। चतुर्भुज गुप्ता, बब्बू खां, गया सिंह, तहसीलदार सिंह, जिलाजीत दूब, मन्ना यादव, ह्रदय सिंह, अशोक मिश्र, मेवालाल यादव, राहुल दूबे, प्रेमराज सिंह, जमील अहमद, जुबेर अहमद, मुन्नू मौर्य आदि उपस्थित रहे।
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