{"_id":"5a22fdca4f1c1b8d698bf4df","slug":"101512242634-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमानत नहीं बचा सके 490 प्रत्याशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमानत नहीं बचा सके 490 प्रत्याशी
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर (भदोही)।
नगर निकाय चुनाव के महाभारत में कूदे 742 प्रत्याशियों में करीब 490 अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। अध्यक्षी के तीसरे तो सभासद और सदस्य के रनरअप तक ही अपनी जमानत बचाने में कामयाब हो सके। अध्यक्षी के कई निकायों में सिर्फ विनर और रनरअप ही जमानत बचाने में सफल हुए। प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने से सरकारी खजाने को राजस्व प्राप्त हुआ।
चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को नामांकन के दौरान जमानत राशि जमा करनी पड़ती है। पालिका और पंचायत अध्यक्ष, सभासद और सदस्य पदों पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को आयोग से तय जमानत राशि जमा की जाती है। इसमें सामान्य, पिछड़ा और एससी वर्ग के लिए अलग-अलग जमानत राशि होती है। जिले की दो नगर पालिका गोपीगंज, भदोही के अलावा अन्य पांचों नगर पंचायतों में अध्यक्ष के करीब 80 तो 113 वार्डों में 662 प्रत्याशियों ने ताल ठोंकी थी। मतगणना के बाद अध्यक्षी से लेकर वार्डों में जीत का सपना देखने वाले कई प्रत्याशी तो अपनी जमानत को भी नहीं बचा सके। ज्ञानपुर नगर में विनर और रनरअप को छोड़कर सभी अन्य पांच की जमानत जब्त हो गई। गोपीगंज में आठ उम्मीदवारों में सिर्फ तीन ही जमानत को बचा सके। खमरिया नगर में 15 में चार, भदोही में 11 में चार ही जमानत बचाए। 113 वार्डों में रनरअप और विनर ही जमानत बचा सके। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो करीब 490 प्रत्याशी अपनी जमानत को बचाने में असफल रहे। सबसे मजे की बात यह रही कि खमरिया नगर में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के प्रत्याशी भी जमानत नहीं बना सके। निर्वाचन कार्यालय की माने तो जमानत न बचा पाने वाले प्रत्याशियों की राशि सरकारी राजस्व में चली जाएगी। अनुमान लगाया कि अध्यक्ष और वार्ड प्रत्याशियों की तीन से चार लाख जमानत राशि मिली होगी।
विज्ञापन
नगर निकाय चुनाव के महाभारत में कूदे 742 प्रत्याशियों में करीब 490 अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। अध्यक्षी के तीसरे तो सभासद और सदस्य के रनरअप तक ही अपनी जमानत बचाने में कामयाब हो सके। अध्यक्षी के कई निकायों में सिर्फ विनर और रनरअप ही जमानत बचाने में सफल हुए। प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने से सरकारी खजाने को राजस्व प्राप्त हुआ।
चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को नामांकन के दौरान जमानत राशि जमा करनी पड़ती है। पालिका और पंचायत अध्यक्ष, सभासद और सदस्य पदों पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को आयोग से तय जमानत राशि जमा की जाती है। इसमें सामान्य, पिछड़ा और एससी वर्ग के लिए अलग-अलग जमानत राशि होती है। जिले की दो नगर पालिका गोपीगंज, भदोही के अलावा अन्य पांचों नगर पंचायतों में अध्यक्ष के करीब 80 तो 113 वार्डों में 662 प्रत्याशियों ने ताल ठोंकी थी। मतगणना के बाद अध्यक्षी से लेकर वार्डों में जीत का सपना देखने वाले कई प्रत्याशी तो अपनी जमानत को भी नहीं बचा सके। ज्ञानपुर नगर में विनर और रनरअप को छोड़कर सभी अन्य पांच की जमानत जब्त हो गई। गोपीगंज में आठ उम्मीदवारों में सिर्फ तीन ही जमानत को बचा सके। खमरिया नगर में 15 में चार, भदोही में 11 में चार ही जमानत बचाए। 113 वार्डों में रनरअप और विनर ही जमानत बचा सके। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो करीब 490 प्रत्याशी अपनी जमानत को बचाने में असफल रहे। सबसे मजे की बात यह रही कि खमरिया नगर में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के प्रत्याशी भी जमानत नहीं बना सके। निर्वाचन कार्यालय की माने तो जमानत न बचा पाने वाले प्रत्याशियों की राशि सरकारी राजस्व में चली जाएगी। अनुमान लगाया कि अध्यक्ष और वार्ड प्रत्याशियों की तीन से चार लाख जमानत राशि मिली होगी।
विज्ञापन