{"_id":"6a9c68083c9fb410160aacda","slug":"100-crore-rupees-spent-on-revamp-yet-power-supply-depends-on-bamboo-poles-bhadohi-news-c-191-1-gyn1003-148214-2026-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: रीवैंप का 100 करोड़ खर्च, फिर भी बांस-बल्ली की बैशाखी पर बिजली आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: रीवैंप का 100 करोड़ खर्च, फिर भी बांस-बल्ली की बैशाखी पर बिजली आपूर्ति
विज्ञापन
मखदुमपुर में बांस बल्ली के सहारे गया बिजली का तार। संवाद
बिजली निगम ने बीते तीन साल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए रीवैंप योजना के तहत 100 करोड़ रुपये खर्च किया। लेकिन अब भी जिले भर में जुगाड़ से बिजली की आपूर्ति की जा रही है। नगरीय इलाके और गांवों की बस्तियों में तारों का जाल, बांस-बल्ली के सहारे आपूर्ति और जर्जर खंभे हैं। जुगाड़ सेे बिजली की आपूर्ति से हादसे का डर है।
जिले में 2.46 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। दो डिवीजन और 29 उपकेंद्र के साथ 98 फीडरों से उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है। 2022 में गांवों से लेकर शहर तक बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए आरडीएसएस (रीवैंप योजना) योजना लाई गई थी। योजना के तहत बिजली व्यवस्था को सुधारने का दावा किया जा रहा था। योजना को तीन साल से अधिक समय होने के बाद अब भी नगरीय इलाकों में खंभे जर्जर हैं। गोपीगंज और सुरियावां की बस्तियों में तारों का जाल है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
नगर में 35 और गांवों में 60 खंभे जर्जर
हमारी टीम ने जिले भर में रीवैंप योजना के तहत हुए काम की पड़ताल की। नगरीय इलाके में 35 और ग्रामीण क्षेत्रों में 60 खंभे नीचे से खोखले मिले। घोसिया के सदर सड़क, वार्ड नंबर छह, शहीद बाबा मजार के पास, जामा मस्जिद के पास, वार्ड नंबर एक में खंभे जर्जर दिखे। गोपीगंज में गणेश मंदिर सड़क पर करीब चार खंभे जर्जर दिखे। खमरिया में वार्ड नंबर 14 मुख्य बाजार, ज्ञानपुर में पुरानी बाजार, बड़ा डीह, नई बाजार मथुरापुर राजमार्ग, वार्ड नंबर 9, सुरियावां वार्ड नंबर 12 शहीद नगर के अलावा कुरमैचा, भुर्रा, कुसौड़ा, चौरी, मानिकपुर में जर्जर खंभे खड़े हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
रीवैंप योजना से यह होने थे काम
-जर्जर तारों व केबलों को बदलना
-बिजली उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि
-नई बिजली लाइनों का निर्माण
-लो-वोल्टेज की समस्या के समाधान को ट्रिपिंग कम करना
-जर्जर खंभा को दुरूस्त किया जाना
-- -- -- -- -- -- --
दृश्य एक : घोसिया नगर के वार्ड नंबर छह में स्टेट बैंक के पीछे सघन इलाके में लगा बिजली का खंभा नीचे से पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। खंभे के नीचे इतना बड़ा होल है कि वह कभी भी गिर सकता है। सघन बस्ती में होने हादसे का भी खतरा बना हुआ है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
दृश्य दो: गोपीगंज के वार्ड नंबर एक पासियान मोहल्ले में लगा बिजली का खंभा लटक गया है। बिजली निगम ने करंट से बचाने के लिए इस पर प्लास्टिक तो लपेट दिया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
दृश्य तीन: गोपीगंज वार्ड नंबर 23 की सघन बस्ती में तारों का जाल फैला हुआ है। तार जमीन से केवल छह से सात फीट ऊपर लटक रहे। जिससे बिजली की आपूर्ति भी होती है। हादसे का डर है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
दृश्य चार : नईबाजार क्षेत्र के मकदूमपुर इलाके यादव, नट बस्ती में अब भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली की आपूर्ति की जाती है। बस्ती में करीब 600 मीटर तक लोग बांस-बल्ली के सहारे तार लेकर गए हैं। सालभर पहले बिजली निगम ने तीन खंभे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। उस पर तार नहीं दौड़ाए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
बोले लोग
गोपीगंज में तारों के जाल की समस्या वर्षों से है। जमीन से केवल पांच से छह फीट ऊंचे तारों से खतरा बना रहता है। कई जगहों खंभे भी जर्जर हैं। इसे दुरुस्त कराना चाहिए। - ज्ञानेश्वर अग्रवाल, गोपीगंज।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
एक साल पहले तीन बिजली के खंभे लगाए गए थे, लेकिन उस पर तार नहीं लगाए गए। अब भी यादव व नट बस्ती में बांस-बल्ली से आपूर्ति होती है। अक्सर ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है। - रामजीत यादव, मकदूपुर, नईबाजार।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
वर्जन
मैंने दो दिन पहले ही जाॅइन किया है। इसलिए सारी रिपोर्ट बता पानी मुश्किल है, लेकिन योजना के तहत कहां-कहां, क्या-क्या काम हुए हैं। इसकी रिपोर्ट मंगाई जाएगी। जहां काम अधूरे हैं या फिर काम नहीं हुए हैं। उसका काम कराया जाएगा। - मुनीष कुमार, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम।
विज्ञापन
जिले में 2.46 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। दो डिवीजन और 29 उपकेंद्र के साथ 98 फीडरों से उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है। 2022 में गांवों से लेकर शहर तक बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए आरडीएसएस (रीवैंप योजना) योजना लाई गई थी। योजना के तहत बिजली व्यवस्था को सुधारने का दावा किया जा रहा था। योजना को तीन साल से अधिक समय होने के बाद अब भी नगरीय इलाकों में खंभे जर्जर हैं। गोपीगंज और सुरियावां की बस्तियों में तारों का जाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर में 35 और गांवों में 60 खंभे जर्जर
हमारी टीम ने जिले भर में रीवैंप योजना के तहत हुए काम की पड़ताल की। नगरीय इलाके में 35 और ग्रामीण क्षेत्रों में 60 खंभे नीचे से खोखले मिले। घोसिया के सदर सड़क, वार्ड नंबर छह, शहीद बाबा मजार के पास, जामा मस्जिद के पास, वार्ड नंबर एक में खंभे जर्जर दिखे। गोपीगंज में गणेश मंदिर सड़क पर करीब चार खंभे जर्जर दिखे। खमरिया में वार्ड नंबर 14 मुख्य बाजार, ज्ञानपुर में पुरानी बाजार, बड़ा डीह, नई बाजार मथुरापुर राजमार्ग, वार्ड नंबर 9, सुरियावां वार्ड नंबर 12 शहीद नगर के अलावा कुरमैचा, भुर्रा, कुसौड़ा, चौरी, मानिकपुर में जर्जर खंभे खड़े हैं।
रीवैंप योजना से यह होने थे काम
-जर्जर तारों व केबलों को बदलना
-बिजली उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि
-नई बिजली लाइनों का निर्माण
-लो-वोल्टेज की समस्या के समाधान को ट्रिपिंग कम करना
-जर्जर खंभा को दुरूस्त किया जाना
दृश्य एक : घोसिया नगर के वार्ड नंबर छह में स्टेट बैंक के पीछे सघन इलाके में लगा बिजली का खंभा नीचे से पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। खंभे के नीचे इतना बड़ा होल है कि वह कभी भी गिर सकता है। सघन बस्ती में होने हादसे का भी खतरा बना हुआ है।
दृश्य दो: गोपीगंज के वार्ड नंबर एक पासियान मोहल्ले में लगा बिजली का खंभा लटक गया है। बिजली निगम ने करंट से बचाने के लिए इस पर प्लास्टिक तो लपेट दिया है।
दृश्य तीन: गोपीगंज वार्ड नंबर 23 की सघन बस्ती में तारों का जाल फैला हुआ है। तार जमीन से केवल छह से सात फीट ऊपर लटक रहे। जिससे बिजली की आपूर्ति भी होती है। हादसे का डर है।
दृश्य चार : नईबाजार क्षेत्र के मकदूमपुर इलाके यादव, नट बस्ती में अब भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली की आपूर्ति की जाती है। बस्ती में करीब 600 मीटर तक लोग बांस-बल्ली के सहारे तार लेकर गए हैं। सालभर पहले बिजली निगम ने तीन खंभे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। उस पर तार नहीं दौड़ाए।
बोले लोग
गोपीगंज में तारों के जाल की समस्या वर्षों से है। जमीन से केवल पांच से छह फीट ऊंचे तारों से खतरा बना रहता है। कई जगहों खंभे भी जर्जर हैं। इसे दुरुस्त कराना चाहिए। - ज्ञानेश्वर अग्रवाल, गोपीगंज।
एक साल पहले तीन बिजली के खंभे लगाए गए थे, लेकिन उस पर तार नहीं लगाए गए। अब भी यादव व नट बस्ती में बांस-बल्ली से आपूर्ति होती है। अक्सर ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है। - रामजीत यादव, मकदूपुर, नईबाजार।
वर्जन
मैंने दो दिन पहले ही जाॅइन किया है। इसलिए सारी रिपोर्ट बता पानी मुश्किल है, लेकिन योजना के तहत कहां-कहां, क्या-क्या काम हुए हैं। इसकी रिपोर्ट मंगाई जाएगी। जहां काम अधूरे हैं या फिर काम नहीं हुए हैं। उसका काम कराया जाएगा। - मुनीष कुमार, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम।