औराई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करीब एक करोड़ 68 लाख की लागत से बनकर तैयार ट्रामा सेंटर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से शोपीस बनकर रह गया है। हैंडओवर होने के बाद भी मरीजों को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस कारण दुर्घटना के शिकार गंभीर मरीजों को प्रयागराज और वाराणसी जाना पड़ता है। जिले में वैसे तो दो जिला अस्पताल, छह सीएचसी और 17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन हाईवे के किनारे अत्याधुनिक सुविधा से लैस अस्पताल न होने से दुर्घटनाओं में घायल मरीजों की उपचार समय से न मिलने से मौत हो जाती है। साल 2016 में तत्कालीन सपा विधायक मधुबाला पासी ने ट्रामा सेंटर की आधारशिला रखी। 2018 में ही उसे पूर्ण होना था, लेकिन करीब दो साल विलंब से 2020 में तैयार हुआ। उसी दौरान कार्यदायी संस्था ने ट्रामा सेंटर को स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर कर दिया। करीब दो साल बाद भी उसका संचालन नहीं हो सका है। ज्ञानपुर। ट्रामा सेंटर पर शासन की ओर से चार चिकित्सक और एक वार्ड ब्वाय की नियुक्ति की गई है, लेकिन वह भी कभी कभार सीएचसी पर दिखते हैं। इसमें दो हड्डी रोग विशेषज्ञ और दो फिजिशियन हैं। संविदा पर एक वार्ड ब्वाय है। कोविड महामारी के समय ट्रामा सेंटर को एन-1 अस्पताल बनाया गया था। राजनीतिक उपेक्षा का शिकार - औराई के ट्रामा सेंटर के संचालन को लेकर जनप्रतिनिधि भी उदासीन है। हैंडओवर के बाद अब तक उसका संचालन क्यों नहीं किया गया इसको लेकर किसी भी विधायक ने आवाज नहीं उठाई। इसको लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। संतोष शुक्ला, जगदीश कुमार ने कहा कि अगर ट्रामा सेंटर संचालित हो तो जिले के लोगों को काफी फायदा मिले। उपचार के लिए उन्हें अन्यत्र न जाना पड़े। ट्रामा सेंटर की सभी प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसे जल्द शुरू करने की कोशिश है, ताकि इसका लाभ मिल सके। - डॉ. संतोष कुमार चक, सीएमओ भदोही