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1.35 करोड़ का बर्न यूनिट डॉक्टरों का आशियाना,

Tue, 04 Oct 2022 12:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Oct 2022 12:58 AM IST
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1.35 crore burn unit has become the home of doctors
ज्ञानपुर। सरपतहां के 100 शैय्या अस्पताल परिसर में करीब एक करोड़ 35 लाख की लागत से बना बर्न यूनिट वरिष्ठ चिकित्सकों का आशियाना बन गया है। करीब पांच साल पूर्व बनकर तैयार यूनिट में आठ स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती हो गई है, लेकिन अब तक यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। अगर वह चलती तो औराई अग्निकांड में झुलसे लोगों को तात्कालिक लाभ मिल जाता। स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए साल 2009 में सरपतहां में 100 शैय्या अस्पताल की आधारशिला रखी गई थी। 14 करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल की लागत 18 करोड़ तक पहुंच गई। अस्पताल निर्माण में करोड़ों की धांधली भी पकड़ी जा चुकी है। तमाम कवायद के बाद अब तक सिर्फ ओपीडी शुरू हो सकी है, जबकि परिसर में एक करोड़ 35 लाख की लागत से बनी 35 बेड की बर्न यूनिट शोपीस बनकर रह गई है। मजे की बात यह है कि एसीयुक्त कक्षों में मरीजों के भर्ती होने की बजाए कई डिप्टी सीएमओ और सीएमएस अपना आशियाना बनाए हुए हैं। विभाग का दावा है कि उसे संचालित करने के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सुख-सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक उसके संचालन को लेकर ही संजीदा नहीं है। माना जा रहा है कि बर्न यूनिट शुरू होता तो औराई की घटना में झुलसे बच्चों और महिलाओं को तात्कालिक रूप से भर्ती कराया जाता है। इससे उनके उपचार में सहूलियत मिलती। यूनिट के न चलने से सभी को बीएचयू सहित अन्य निजी व सरकारी अस्पतालों में भेजना पड़ा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में एक करोड़ 67 लाख की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर भी आमजन के लिए बेकार साबित हो रहा है। साल 2020 में हैंडओवर हुए ट्रॉमा सेंटर में स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती तो कर दी गई, लेकिन अब तक सुविधाएं मुहैया नहीं हो सकी। नरथुआं के पूजा पंडाल स्थल से मात्र एक से दो किमी दूर स्थित ट्रॉमा सेंटर में अगर सुविधाएं मयस्सर होती तो अग्निकांड में झुलसे लोगों को वहीं भर्ती कराया जाता, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसे लेकर क्षेत्रीय लोगों में खासी नाराजगी देखी गई। उक्त ट्रॉमा सेंटर को चालू करने के लिए काफी समय से मांग हो रही है, लेकिन अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक उदासीन बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर ट्रॉमा सेंटर को शुरू नहीं करना हो तो उसे बनाया ही क्यों गया।
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