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0.3 फीसदी वनक्षेत्र से कैसे बचेगा पर्यावरण
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Sun, 05 Jun 2016 01:39 AM IST
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पर्यावरण संरक्षण को लेकर भले ही सरकार प्रयासरत हो, लेकिन धरातल पर हरियाली बिखेरने की स्थिति में खास सुधार होता नहीं दिख रहा है। एक दशक में जिले में करीब पांच लाख पौधे लगाए गए, लेकिन वन क्षेत्र का दायरा 0.3 फीसदी पर ही अटका रहा। पौधों का संरक्षण न होने से स्थिति जस की तस बनी हुई। कम वनक्षेत्र के पीछे सबसे बड़ी वजह पौधरोपण के लिए भूमि का अभाव है। विभाग का दावा है कि इस साल ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी अभियान सफल हुआ तो जिले में वन क्षेत्र का दायरा तीन फीसदी हो जाएगा।
आधुनिकता की चमक-दमक में बढ़ते नगरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के चलते वन क्षेत्र का दायरा सिमटता जा रहा है। जिन इलाकों में कभी बड़े-बड़े बगीचे या वन क्षेत्र रहा करते थे, वहां अब बस्ती और कालोनियां बस गईं हैं। पौधों की कटान होने से स्थिति दिन ब दिन भयावह होती जा रही है। पर्यावरण का संतुलन बनाने के लिए पौधों का होना जरूरी है। इसके लिए सरकार योजनाओं के माध्यम से हर साल लाखों रुपये खर्च कर रही है। वन विभाग की ओर से जुलाई से सितंबर तक अभियान चलाकर पौधरोपण कराया जाता है, लेकिन संरक्षण न होने से ज्यादातर पौधे सूख जाते हैं। रही सही कसर वन माफियाओं की सक्रियता पूरी कर दे रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो गत 10 वर्षों में करीब पांच लाख पौधे रोपे गए। इसमेें 10 फीसदी भी पौधे नहीं बचे। इससे जिले में वन क्षेत्र का दायरा 0.3 फीसदी से आगे नहीं बढ़ सका, जिससे पर्यावरण को बेहतर बनाने की उम्मीदों पर झटका लग रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने कहा कि विभागीय स्तर से हर साल पौधरोपण कराया जाता है। लोगों का सहयोग न मिलने से पौधे सूख जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ग्रीन यूपी क्लीन यूपी के तहत जुलाई में 88 हजार 500 पौधे एक साथ लगाए जाएंगे। करीब 90 हेक्टेयर में पौधरोपण होगा। अभियान में लगने वाले 80 फीसदी पौधे भी बच गए तो वन क्षेत्र का दायरा ढाई से तीन फीसदी हो जाएगा।
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आधुनिकता की चमक-दमक में बढ़ते नगरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के चलते वन क्षेत्र का दायरा सिमटता जा रहा है। जिन इलाकों में कभी बड़े-बड़े बगीचे या वन क्षेत्र रहा करते थे, वहां अब बस्ती और कालोनियां बस गईं हैं। पौधों की कटान होने से स्थिति दिन ब दिन भयावह होती जा रही है। पर्यावरण का संतुलन बनाने के लिए पौधों का होना जरूरी है। इसके लिए सरकार योजनाओं के माध्यम से हर साल लाखों रुपये खर्च कर रही है। वन विभाग की ओर से जुलाई से सितंबर तक अभियान चलाकर पौधरोपण कराया जाता है, लेकिन संरक्षण न होने से ज्यादातर पौधे सूख जाते हैं। रही सही कसर वन माफियाओं की सक्रियता पूरी कर दे रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो गत 10 वर्षों में करीब पांच लाख पौधे रोपे गए। इसमेें 10 फीसदी भी पौधे नहीं बचे। इससे जिले में वन क्षेत्र का दायरा 0.3 फीसदी से आगे नहीं बढ़ सका, जिससे पर्यावरण को बेहतर बनाने की उम्मीदों पर झटका लग रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने कहा कि विभागीय स्तर से हर साल पौधरोपण कराया जाता है। लोगों का सहयोग न मिलने से पौधे सूख जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ग्रीन यूपी क्लीन यूपी के तहत जुलाई में 88 हजार 500 पौधे एक साथ लगाए जाएंगे। करीब 90 हेक्टेयर में पौधरोपण होगा। अभियान में लगने वाले 80 फीसदी पौधे भी बच गए तो वन क्षेत्र का दायरा ढाई से तीन फीसदी हो जाएगा।
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