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मुंबई में युवक मौत, अस्पताल कर्मियों ने कराया अंतिम संस्कार
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मुंबई में युवक मौत, अस्पताल कर्मियों ने कराया अंतिम संस्कार
नगर बाजार (बस्ती)। मुंबई के सिवड़ी में कैर्ट्स का काम करने वाले नगर बाजार कस्बे के 23 वर्षीय बंटी की मुंबई में इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने उसका अंतिम संस्कार कराया। निधन के समय मृतक की मां ही उसके साथ थी।
कस्बे के राधेश्याम गुप्ता का बेटा बंटी काफी दिन से मुंबई में रहता था। करीब दो माह पहले उसकी अचानक तबीयत खराब हो गई। सूचना पाकर मां गौरी बेटे को देखने मुंबई चली गईं। इलाज मुंबई के शिवड़ी में स्थित टीबी अस्पताल में चल रहा था। कोरोना वायरस की वजह से बंटी व उनकी मां मुंबई में ही फंस गए। मां गौरी ने फोन पर बताया कि उसके पास रुपये भी नहीं थे। किसी तरह शिवड़ी के सरकारी टीबी अस्पताल में इलाज चल रहा था। अस्पताल से ही खाने-पीने को मिल जाता था। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान बंटी की मौत हो गई। उनके पास रुपये भी नहीं थे। अस्पताल के कर्मचारियों ने बेटे का दाह संस्कार शिवड़ी शमशान घाट पर कर दिया।
उम्र भर रहेगा मलाल
मृतक बंटी के पिता राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि लॉकडाउन कीवजह से एक बेटा राजेश बंगलुरू में फंसा है। उससे छोटा बेटा गोपाल उनके साथ रहता है। इस बात का मलाल हमेशा रहेगा कि लॉकडाउन की वजह से बेटे का अंतिम दर्शन नहीं कर पाए।
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नगर बाजार (बस्ती)। मुंबई के सिवड़ी में कैर्ट्स का काम करने वाले नगर बाजार कस्बे के 23 वर्षीय बंटी की मुंबई में इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने उसका अंतिम संस्कार कराया। निधन के समय मृतक की मां ही उसके साथ थी।
कस्बे के राधेश्याम गुप्ता का बेटा बंटी काफी दिन से मुंबई में रहता था। करीब दो माह पहले उसकी अचानक तबीयत खराब हो गई। सूचना पाकर मां गौरी बेटे को देखने मुंबई चली गईं। इलाज मुंबई के शिवड़ी में स्थित टीबी अस्पताल में चल रहा था। कोरोना वायरस की वजह से बंटी व उनकी मां मुंबई में ही फंस गए। मां गौरी ने फोन पर बताया कि उसके पास रुपये भी नहीं थे। किसी तरह शिवड़ी के सरकारी टीबी अस्पताल में इलाज चल रहा था। अस्पताल से ही खाने-पीने को मिल जाता था। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान बंटी की मौत हो गई। उनके पास रुपये भी नहीं थे। अस्पताल के कर्मचारियों ने बेटे का दाह संस्कार शिवड़ी शमशान घाट पर कर दिया।
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उम्र भर रहेगा मलाल
मृतक बंटी के पिता राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि लॉकडाउन कीवजह से एक बेटा राजेश बंगलुरू में फंसा है। उससे छोटा बेटा गोपाल उनके साथ रहता है। इस बात का मलाल हमेशा रहेगा कि लॉकडाउन की वजह से बेटे का अंतिम दर्शन नहीं कर पाए।
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