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Basti News: गुजरने वाले हैंं साल... बिना भवन पढ़ाई पूरी कर रहे 476 परिषदीय स्कूलों के बच्चे

Fri, 08 Dec 2023 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Fri, 08 Dec 2023 12:02 AM IST
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Years are about to pass...children of 476 council schools are completing their studies without buildings.
वर्ष 2023 गुजरने वाला है। बेसिक शिक्षा परिषद जिले में एक दो नहीं बल्कि सूचीबद्ध किए गए 476 प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों के लिए सुसज्जित भवन नहीं बना सका। कहीं खुले आसमान के नीचे तो कहीं बरामदे या एक कमरे में जैसे- तैसे पढ़ाई पूरी हो रही है। इधर ठंड भी शुरू हो गई हैं। अब या तो भवन विहीन ये विद्यालय कागजों में संचालित किए जाएंगे या फिर बच्चे स्कूल में आकर ठिठुरने को विवश होंगे।
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तीन साल पहले जीर्ण-शीर्ण हो चुके जिले के 476 स्कूल भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था। इसमें से 298 स्कूल भवन ढहा भी दिए गए। अधिकांश ढहाए गए स्कूल भवनों का मलबा भी नीलाम हो चुका है। उम्मीद थी कि कम से कम ढहाए गए इन स्कूलों को नया भवन मिल जाएगा। मगर इसी के बाद सभी कवायद ठप हो गई। इस साल भी इन स्कूलों के लिए भवन बनने की उम्मीद न के बराबर है। अभी तक शासन से बजट ही स्वीकृत नहीं हो सका है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। जिससे ढहाए गए स्कूल के बच्चे या तो एक कमरे में शिफ्ट कर दिए गए हैं या फिर दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए गए हैं। जिन स्कूलों के बच्चों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया गया है उनका अस्तित्व भी लगभग खत्म है। भवन न होने से इन स्थलों पर स्कूल जैसी चहलकदमी नहीं रह गई है।
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अव्यवस्था का लाभ उठा रहे प्राइवेट स्कूल
जिले में संचालित 2071 परिषदीय स्कूलों में से एक चौथाई स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं। इसका सीधा लाभ प्राइवेट स्कूल के संचालक उठा रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों में भवन, कुर्सी, बेंच आदि की व्यवस्था न होने से अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट विद्यालयों में कराने के लिए विवश हो गए। इसीलिए परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या भी कम हो गई।
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तीन साल पहले भेजा गया था प्रस्ताव
निष्प्रयोज्य हो चुके विद्यालय भवन को ढहाकर नए सिरे से बनाए जाने का प्रस्ताव तीन साल से भेजा जा रहा है। शासन ने शुरुआती दौर में संज्ञान भी लिया। जीर्ण-शीर्ण भवनों को ढहाने के निर्देश दिए गए। मगर इसके बाद उच्च स्तर पर सिफारिश न होने से मामला अटक गया। समय बीतने के साथ प्रस्तावित स्कूल भवनों का निर्माण जिम्मेदारों के लिए भूले-बिसरे दिनों की बात बनकर रह गई।
20 हजार से अधिक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 20 हजार से अधिक बच्चों की पढ़ाई भवन न होने के चलते प्रभावित हो गई है। इनका स्कूल आना-जाना बहुत कम हो रहा है। स्कूल आने पर इन्हें या तो खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ रहा है या टीन शेड के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है।

दूसरे स्कूल में पिकौरा बख्श के बच्चे
नगर पालिका क्षेत्र के पिकौरा बख्श प्राथमिक स्कूल के निष्प्रयोज्य भवन को एक साल पहले ध्वस्त कर दिया गया। धरातल पर इस विद्यालय का नामोनिशान नहीं है। मगर विभागीय अभिलेख में यह स्कूल संचालित है। जबकि यहां के बच्चे दूसरे मोहल्ले के गांधीनगर परिषदीय विद्यालय में मर्ज कर दिए गए हैं।
एक कमरे में पढ़ाई कर रहे कक्षा एक से आठ तक के बच्चे

बीएसए कार्यालय परिसर में चल रहा आदर्श प्राथमिक विद्यालय भवन भी निष्प्रयोज्य घोषित कर ध्वस्त करा दिया गया। दो साल बीतने पर भी नए भवन का निर्माण नहीं हुआ। यहां अध्ययनरत कक्षा एक से आठ तक के 200 बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरे की व्यवस्था है।
मीतनपुर में एक कमरे में हो रही पढ़ाई

बहादुरपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत मीतनपुर का प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण ध्वस्त किया जा चुका है। यहां केवल एक कमरा बचा है। कुल 90 बच्चे इस विद्यालय में पंजीकृत हैं। एक ही कमरे में सभी कक्षा के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है।

प्राथमिक स्कूल खैराटी के पास सिर्फ एक कमरा
बनकटी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खैराटी के जर्जर भवन को ध्वस्त कराने के बाद केवल एक कमरा शेष बचा है। इस कक्ष में शिक्षक और स्टॉफ बैठे या बच्चे पढ़ाई करें यह तय नहीं हो पा रहा है। जबकि इस विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक नामांकित बच्चों की संख्या 67 है।

पूरा नहीं हुआ 34 स्कूल भवनों का निर्माण
विभाग की ओर से ढहाए गए 298 स्कूल भवनों में से सिर्फ 34 स्कूल भवनों का ही निर्माण शुरू कराया गया। प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय पर 15.14 लाख और जूनियर विद्यालय के निर्माण पर 28 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। सॉऊघाट ब्लाक में 24, दुबौलिया में दो, कुदरहा में छह और परशुरामपुर में दो विद्यालय भवनों का निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है।

जर्जर एवं ढहाए गए स्कूल भवनों की सूची शासन को भेजी जा चुकी है। 34 विद्यालय स्वीकृत हुए जिनका निर्माण जल्द ही पूर्ण होने वाला है। शेष स्कूल भवनों के निर्माण के लिए भी शासन को पत्र लिखा गया है।
-अनूप कुमार, बीएसए।
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