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कलश स्थापना के लिए करना होगा इंतजार

Fri, 16 Oct 2020 11:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2020 11:54 PM IST
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Will have to wait for the installation of the urn
रेलवे स्टेशन रोड स्थित काली मंदिर हो रहा जगमग। - फोटो : BASTI
कलश स्थापना के लिए दोपहर तक करना होगा इंतजार
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बस्ती। अबकी शारदीय नवरात्रि पर माता जगदंबा भक्तों के पास घोड़े पर सवार होकर आएंगी। ज्योतिष मान्यता के अनुसार चित्रा और वैधृति नक्षत्र में कलश स्थापना नहीं की जाती। ऐसे में 11:52 बजे चित्रा नक्षत्र की समाप्ति के बाद अभिजीत मुहूर्त में इस बार कलश स्थापना आरंभ होगी। स्वाति नक्षत्र में गुरु से युक्त धनु लग्न रहेगी। धनु राशि पर गुरु के होने से राहु की शांति के लिए यह सबसे उत्तम योग बनेगा।
नगर के दुर्गामंदिर के पुजारी जय प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र और देवीभाग्वत पुराण में मां दुर्गा जिस वाहन से आगमन करती हैं, उससे आने वाले भविष्य की घटनाओं के बारे में संकेत मिलता है। देवीभाग्वत पुराण के अनुसार नवरात्र की शुरुआत सोमवार या रविवार को होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। अगर शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि की शुरुआत होने पर मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं। बृहस्पतिवार या शुक्रवार को नवरात्रि आरंभ होने पर माता डोली पर आती हैं। बुधवार के दिन नवरात्रि प्रारंभ होने पर मां नाव की सवारी कर धरती पर आती हैं। माता जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं उसके अनुसार वर्ष में होने वाली घटनाओं का आकलन किया जाता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित जयप्रकाश धर द्विवेदी ने पंचांग अध्ययन के बाद बताया कि शनिवार प्रात: अभिजीत मुहूर्त के दौरान स्वाति नक्षत्र में गुरु से युक्त धनु लग्न रहेगी। ऐसे में दोपहर 11:47 बजे से अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना शुरू होगी। मां दुर्गा की नौ दिवसीय आराधना केे क्रम में नौ दिन तक मां के अलग-अलग रूपों का ध्यान किया जाएगा। प्रतिपदा को शैलपुत्री, द्वितीया को ब्रह्मचारिणी, तृतीया -चंद्रघंटा, चतुर्थी कुष्मांडा, पंचमी -स्कंदमाता, षष्ठी -कात्यायनी, सप्तमी- कालरात्रि, अष्टमी -महागौरी और नौमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। संवाद
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ऐसे करें कलश स्थापन
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर, चौकी के समक्ष कलश स्थापना के लिए मिट्टी की वेदी बनायें। जिसमें भीगे हुये जौ के दाने बिखेर दें, वेदी के बीच में कलश स्थापना से पूर्व एक अष्टदल कमल बनायें। कलश के अंदर तीर्थ जल भर दें। उसके ऊपर पंच पल्लव लगाकर उस पर किसी मिट्टी के पात्र में चावल भरकर रख दें। कलश के कण्ठ में कलावा बांधे इसके बाद सूखे नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर कलश के ऊपर रखें कटोरे में रख दें। नारियल को सीधा खड़ा करके रखना है।
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